सरकार सिर्फ़ नोट वालों की और वोट वालों की सुनती है, मध्यवर्ग का तेल निकालने में लगी है। ट्रांसपोर्ट सर्विसेज़ कारख़ानों के उत्पाद दवा-दारू सब महँगा हो रहा है जबकि आय हर तरफ़ से घट रही है। यही वर्ग इनकम टैक्स भी दे रहा है और इसी की कोई कहीं सुनवाई नहीं है! कोरोना की महामारी में कराहते मध्यवर्ग की करुण पुकार सुनिये शीतल के सवाल में।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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