यूपी के औरैया में ऐक्सीडेंट में एक साथ 24 प्रवासी मज़दूरों के मारे जाने की सूचना है और पंद्रह अस्पताल में जीवन मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे हैं , औरंगाबाद में सोलह मज़दूरों को मालगाड़ी द्वारा कुचल कर मार दिये जाने की दुर्घटना के तुरंत बाद यह हादसा हुआ है । इसके अलावा लाकडाउन की घोषणा के बाद विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में रोज़ाना तमाम मज़दूरों की बलि चढ़ रही है । देश स्तब्ध है कि उन्नीस हज़ार रेलों के रोज़ संचालन की क्षमता के बावजूद सरकार कुंभकर्ण हो चुकी है।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।




















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