चूँकि बीजेपी जानती है कि उसे वोट बजट से नहीं हिंदू-मुसलमान-पाकिस्तान से मिलता है तो उसे क्या ज़रूरत है कि वह बजट के तनाव में क्यों रहे? मोदी सरकार के दुबारा केंद्रीय सत्ता में आने के बाद पेश किए गए बजट में यही झलकता है। शीतल के सवाल में देखिए वरिष्ठ आर्थिक संपादक आलोक जोशी और वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी के साथ चर्चा।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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