जिस तरह से कृषि बिल जबरन लाया गया और जिस तरह उसे वापस लिया गया बिना बहस के उससे साफ है मोदी सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों की कोई परवाह नहीं है . वह सुनना नहीं चाहती . और जिस तरह सांसदों को निलंबित किया गया है वह इसकी पुष्टि भी करता है . सरकार को सवाल पसंद नहीं है . आज की जनादेश चर्चा इसी पर
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