मोदी की चुनावी रणनीति से उभरे पीके ने चुनावी राजनीति और रणनीति का नया बाजार विकसित कर दिया है .घाट घाट का पानी पीने के बाद क्या पीके फिर अपने पुराने घर लौट रहे हैं .उनकी टिपण्णी से तो ऐसा ही लग रहा है .आखिर पीके की जरूरत ही क्या है ?आज की जनादेश चर्चा इसी पर .
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