केरल में अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण कारण से एक गर्भवती हथिनी का दारुण अंत हुआ लेकिन उससे भी शर्मनाक वह अभियान था जिसने तथ्यों की परवाह किये बग़ैर इसे मुसलमानों पर लादने की पुरज़ोर कोशिश की। हमारे समाज के भीतर सामुदायिक नफ़रत के रोगाणु असामान्य हो चले हैं जिनके चलते मामला कुछ भी हो हम पहले उसमें मुसलमान तलाशते मिलते हैं! शीतल पी सिंह का विवेचन।
ट्रेंडिंग
ख़बर
अगली खबर लोड हो रही है...
ताजा खबरें
- Advertisement
- Advertisement
Advertisement 122455
पाठकों की पसन्द
- Advertisement
- Advertisement
Advertisement 1224333
वीडियो
- Advertisement
- Advertisement
Advertisement 1345566

























