केरल में अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण कारण से एक गर्भवती हथिनी का दारुण अंत हुआ लेकिन उससे भी शर्मनाक वह अभियान था जिसने तथ्यों की परवाह किये बग़ैर इसे मुसलमानों पर लादने की पुरज़ोर कोशिश की। हमारे समाज के भीतर सामुदायिक नफ़रत के रोगाणु असामान्य हो चले हैं जिनके चलते मामला कुछ भी हो हम पहले उसमें मुसलमान तलाशते मिलते हैं! शीतल पी सिंह का विवेचन।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।




















.jpg&w=3840&q=75)

