राहुल का ये दावा कितना सही है कि उनकी यात्रा ने बीजेपी की घृणा की राजनीति के ख़िलाफ़ एक नया विचार खड़ा कर दिया है? क्या है यात्रा से निकला ये नया नरैटिव? क्या देश के अवाम इस नए नरैटिव को समझ पा रहे हैं? इस नरैटिव को कितनी स्वीकार्यता मिल रही है? क्या ये नरैटिव मोदी-शाह की राजनीति को उलटने की ताक़त रखता है?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























