नागरिकता क़ानून का विरोध कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में भारत में ही नहीं दुनिया भर में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन ऐसे में भारत के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पूरे आंदोलन से ग़ायब हैं। किसी भी प्रदर्शन में राहुल अब तक नहीं दिखाई दिए हैं। जबकि उन्हें जनता के संघर्ष में खड़े होना चाहिए था। ऐसा ही हाल कुछ अन्य युवा नेताओं का है, जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है। सुनिए, क्या कहा वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह ने।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।














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