कंगना आज सबसे बड़ी खबर हैं । सीमा पर चीन भी उनके सामने कुछ नहीं है, चीन कुछ किलोमीटर और भारत में धँस आये तो भी शायद ही फ़र्क़ पड़े । राजपूत करणी सेना नाम का एक मिलिटेंट संगठन उनकी जाति की पहचान को लेकर तलवार लेकर मैदान में उतर पड़ा है। उसी से समझने की कोशिश कर रहे हैं शीतल पी सिंह
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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