मंदिर के उद्घाटन के लिए पूरी सरकार क्यों लगी हुई है? उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री और बीजेपी के तमाम नेताओं की हाज़िरी क्या साबित करेगी? क्या विपक्षी नेताओं को न्यौता देना राजनीतिक प्रपंच नहीं है? क्या धार्मिक अभियान की आड़ में वोट बैंक की राजनीति नहीं की जा रही है? क्या मोदी और उनकी पार्टी इस आयोजन के ज़रिए चुनावी लक्ष्य साधने की कोशिश नहीं कर रही है?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।

























