स्वीडन के माल्मो शहर में हिंसक घटनाओं के चलते भारत में सोशल मीडिया पर घृणा के प्रचार की लहर उठा दी गई है । इसे बेंगलूरू की हालिया घटनाओं से जोड़ा जा रहा है और कहा जा रहा है कि मुसलमान दुनिया के सभ्यतम देशों में भी रहने लायक़ नहीं । इसी मसले की मीमांसा कर रहे हैं शीतल पी सिंह
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।





















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