आरक्षण पर तब एक बार फिर से बहस शुरू हो गई जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह राज्य सरकारों का अपना फ़ैसला है और इसमें कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता। विपक्षी दलों के साथ ही दलित राजनीति से जुड़े सरकार में शामिल नेताओं ने भी विरोध किया। उन्होंने सरकार, बीजेपी और संघ को निशाने पर क्यों लिया? क्या आरक्षण को ख़त्म किया जा रहा है और कौन कर रहा है यह सब? देखिए शीतल के सवाल में वरिष्ठ पत्रकार शैलेश और आशुतोष की चर्चा।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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