प्रशांत भूषण दोषी माने जा चुके थे। सज़ा सुनाई जानी थी। पूरे साढ़े चार घंटे सुनवाई हुई, अटॉर्नी जनरल वेणुगाोपाल और वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने लंबी लंबी दलीलें दीं। लेकिन सुनवाई के बाद अदालत बिना सज़ा सुनाए उठ गई। आखिर क्यों? प्रशांत भूषण के सहयोगी स्वराज इंडिया अभियान के योगेंद्र यादव और कानून विशेषज्ञ अवीक साहा से आलोक जोशी की बातचीत।
लेखक सीएनबीसी आवाज़ के पूर्व संपादक हैं, आर्थिक मामलाों के विशेषज्ञ हैं और समसामयिक विषयों पर लिखते रहते हैं।















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