आज सुप्रीम कोर्ट ने फिर कह दिया कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है और सोशल मीडिया उबल पड़ा । अमरीकी अश्वेत के सवाल पर मानवीय दिखने वाले आरक्षण की चर्चा छिड़ते ही श्वेत हो गये । जाति को लेकर सड़ते भारतीय समाज में अपने मन की सफ़ाई का काम कब शुरू होगा ? पूछ रहे हैं शीतल पी सिंह
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।








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