आज पाँच बजे शाम पूरे देश में बेरोज़गार युवाओं ने सरकार के कान तक अपनी बात पहुँचाने के लिये थालियाँ बजाईं । उन्होंने एक घंटे तक ट्विटर पर ट्रेंड भी कराया और बात सरकार के कान में पहुँच भी गई यह संकेत भी मिला पर मीडिया ज़रा भी न हिला , क्यों ? बता रहे हैं शीतल पी सिंह
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।
























