क्या यूपी की पुलिस मुसलमानों और दलितों के बहिष्कार का माहौल बना रही है? उसने किसके इशारे पर हिटलरी फ़रमान जारी किया? क्या अदालत को खुद-ब-खुद संज्ञान लेकर ऐसे पुलिस अफ़सरों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई नहीं करनी चाहिए?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























