उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता किस मक़सद से लागू करने की बात की जा रही है? क्या कोई राज्य अपने दम पर ऐसा कर सकता है? अगर ये कानून लागू हो जाता है तो हिंदुओं को उससे क्या हासिल होगा? क्या इससे उन्हें कोई नुक़सान भी हो सकता है?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























