फ्रांसीसी पत्रिका शार्ली एब्दू ने हज़रत मोहम्मद के पंद्रह साल पुराने कार्टूनों को फिर छापा है। ज़ाहिर है कि इससे बावेला मच गया है। पेश है इस विवाद के विभिन्न पहलुओं को खँगालती वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की रिपोर्ट
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























