हागिया सोफ़िया पर हाय-हाय क्यों ?
मज़हबी श्रेष्ठता के प्रश्न हमेशा से मनुष्य के ज़रूरी सवालों को बहस से बाहर कर दिया करते हैं। ख़ाली जेब ख़ाली पेट लोग इन सवालों पर लड़ मरते हैं लड़ मर सकते हैं । सियासत इसको जानती है और समय समय पर इसका स्तेमाल करती रही है । इस्तांबुल में भी यही हो रहा है “पड़ोस” का हाल सुना रहे हैं दानिश्वर वी एन राय