17 अगस्त से राहुल गाँधी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ कर रहे हैं और पूरे बिहार में घूम रहे हैं। यात्रा का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि ‘भारत निर्वाचन आयोग’ विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बहाने किस तरह लोगों के वोट के अधिकार को छीन रहा है, किस तरह तमाम प्रक्रियाओं की जटिलताओं में लोगों को फँसाकर, दस्तावेजों को आड़ बनाकर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को छीना जा रहा है। स्वस्थ लोकतंत्र के नज़रिये से यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन इतनी महत्वपूर्ण यात्रा को ना ही टीवी मीडिया जगह दे रहा है और न ही राष्ट्रीय अख़बार। विपक्ष के सबसे बड़े नेता, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुआई वाली इस यात्रा को लगभग ‘ब्लैकआउट’ में तब्दील कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ़ ‘मीडिया का पीएम मोदी प्रेम’ सनक के स्तर को पार कर चुका है। पीएम मोदी इन दिनों जापान की द्विपक्षीय यात्रा पर हैं। अख़बार जिस तरह पीएम की खबरों से रंगे हुए हैं उससे लग रहा है कि कई दशकों बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री जापान गया है। खबरें इस तरह लिखी जा रही हैं जैसे जापान यात्रा के बाद भारत संकटमुक्त हो जाएगा। लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए कि मोदी अब तक 8 बार जापान की यात्रा कर चुके हैं।
राहुल की वोटर अधिकार यात्रा को बदनाम करने में झोंकी ताक़त, पर नाकाम!
- विमर्श
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- 31 Aug, 2025

वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी, दीपांकर भट्टाचार्य और तेजस्वी यादव
राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा को बदनाम करने के लिए विरोधियों ने पूरी ताक़त झोंकी, लेकिन जनता के समर्थन से यह अभियान और मज़बूत हुआ। पढ़िए, वंदिता मिश्रा अपने साप्ताहिक कॉलम में क्या लिखती हैं।
असलियत यह है कि जापान यात्रा का यह कवरेज इसलिए बढ़ाचढ़ाकर दिखाया जा रहा है जिससे लोगों को यह महसूस न होने पाए कि पीएम मोदी की विदेश नीति अब आपदाग्रस्त अवस्था में पहुँच चुकी है। यह सच्चाई अब सबके सामने है कि 2014 के बाद से अबतक पीएम मोदी ने विदेश नीति के नाम पर जो कुछ भी किया है; सभी, आपदा ही साबित हुए हैं। चीन और अमेरिका इसके सटीक उदाहरण हैं। पीएम मोदी की ट्रंप से ‘दोस्ती’ के भरोसे टिकी भारत की विदेश नीति औंधे मुँह गिर चुकी है। जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के ख़िलाफ़ बोल रहे हैं, भारत को आर्थिक नुकसान पहुँचा रहे हैं उससे यह साफ़ हो चुका है कि पीएम मोदी का उनका व्यक्तिगत विदेश नीति का दृष्टिकोण एक फ्लॉप शो था। विदेश नीति का यह फ्लॉप शो अब नरेन्द्र मोदी की राजनीति को भी नुकसान पहुँचा रहा है। देश के लोग इस असलियत को आगामी चुनावों के अनुपात में ज़्यादा आत्मसात न कर लें इसके लिए मुख्यधारा की मीडिया को डयूटी पर लगा दिया गया है और मीडिया तरह तरह के हथकंडे अपना कर नरेंद्र मोदी की छवि को भाग्यविधाता बनाने की कोशिश में व्यस्त भी है।