राजस्थान सीजेपी टीम पर हमले का आरोप। फाइल फोटो
राजस्थान के रामपुरा-कांवरपुरा गाँव में गुंडों ने कॉक्रोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमला किया। उन पर पत्थर फेंके, उन्हें पीटा, उनकी गाड़ियों के शीशे तोड़ डाले।
राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने गुंडों की इस हिंसा का बचाव यह कह कर किया कि उनमें सी जे पी के लोगों के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा था क्योंकि वे स्कूल की निगरानी के नाम पर बच्चों की पढ़ाई में बाधा डाल रहे थे। उन्होंने इससे भी आगे बढ़कर उन्हें बधाई दी।
स्थानीय विधायक ने इनकार किया कि गुंडों का भाजपा से कोई रिश्ता है। लेकिन जब वे यह कह रहे थे, उन गुंडों में से एक उनके पीछे खड़ा था।
पश्चिम बंगाल में पिछले हफ़्ते लगातार 3 दिनों तक गुंडे जादवपुर यूनिवर्सिटी पर हमला करते रहे। एक दावा यह है कि वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से संबद्ध थे। भाजपा नेता और मंत्री दिलीप घोष ने यूनिवर्सिटी पर सर्जिकल स्ट्राइक की धमकी दी है। भाजपा नेता और विधायक शर्बरी मुखर्जी ने परिसर में रात भर तांडव करने की धमकी दी।
पहले तो पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इनकार किया कि गुंडों का भाजपा से कुछ संबंध था लेकिन बाद में एक जनसभा में बोलते हुए उन्होंने धमकी दी कि वे जादवपुर यूनिवर्सिटी में राष्ट्रवाद स्थापित करके रहेंगे। ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का ख़ात्मा करेंगे। बंगाल में रहना है तो ‘वंदे मातरम’ कहना होगा: ये अधिकारी की धमकियाँ हैं।
इस हिंसा के ख़िलाफ़ मिदनापुर के एक कॉलेज में विद्यार्थियों के प्रदर्शन पर गुंडों ने हमला किया। आरोप है कि हमलावर ए बी वी पी से जुड़े हुए हैं।
इसके पहले पश्चिम बंगाल के बाँकुड़ा में गुंडों ने सी जे पी के कार्यकर्ता शेख़ अब्दुल हाफिज और उनके पिता शेख़ मोहम्मद माफ़िक़ पर हमला किया और मोहम्मद माफ़िक़ की हत्या कर दी। आरोप है कि गुंडों का रिश्ता भाजपा से है। मुख्यमंत्री ने इससे इनकार किया है।बंगाल में विधान सभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद हर जगह तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर हमले हो रहे हैं। जो ऐसा कर रहे हैं उनके बारे में भी कहा जा रहा है कि वे गुंडे नहीं, जनता हैं।
सी जे पी के कार्यकर्ताओं को धमकी दी जा रही है कि वे जहाँ भी जाएँगे, वहाँ उनका ऐसे ही इलाज किया जाएगा। कॉर्पोरेट दुनिया के कुछ लोग और कई पत्रकार भी बहुत खुश हैं कि ‘जनता’ सी जे पी पर हमला कर रही है।
पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम के पहले छात्राओं के हॉस्टल पर गुंडों ने हमला किया। छात्राओं को कमरे में बन्द कर दिया, डराया, धमकाया। कहा जा रहा है कि वे गुंडे नहीं, ए बी वी पी के सदस्य हैं।
उत्तर प्रदेश में काँवड़िए राह चलते लोगों, गाड़ियों और पुलिस के अफ़सरों पर हमले कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी रो रोकर अपनी बेगुनाही की गवाही दे रहा है। कह रहा है कि अगर उसने गलती की हो तो काँवड़िए उसे जूता मार सकते हैं। नमाज़ियों को जूते की ठोकर मारनेवाले कांवड़ियों के सामने लाचार हैं। इन काँवड़ियों को श्रद्धालु कहा जाए या गुंडे?
वैसे भारत में पिछले 13 साल से अलग-अलग शक्ल में गुंडों का राज ही चल रहा है लेकिन इस 15 अगस्त को जबसे नरेंद्र मोदी ने ‘दिमाग़ी नक्सलों’ को पहचानने और उनका उपाय करने का उकसावा दिया है, तब से जगह-जगह उन लोगों पर हमला बढ़ गया है जो नरेंद्र मोदी के हिसाब से दिमाग़ी नक्सल हैं।
सी जे पी के कार्यकर्ता हिंसा नहीं कर रहे थे। वे स्कूलों के हालात का जायज़ा ले रहे थे। बंगाल में भी विद्यार्थी हिंसा नहीं कर रहे थे। पुणे में छात्राएँ शायद राहुल गांधी के कार्यक्रम में जानेवाली थीं। इन सबकी अपनी माँगें हैं। इन सब पर गुंडों ने हमला किया।
- पत्रकार आशुतोष ने लिखा कि “देश में एक खतरनाक फासीवादी ट्रेंड शुरू हुआ है । कोई किसी तरह की मांग करे तो घेर के मारो, हाथ पैर तोड़ दो । और फिर कहो ये जनता का ग़ुस्सा है।”
यह ट्रेंड लेकिन इतना भी नया नहीं है। नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ जो शाहीन बाग आंदोलन हुआ, उसपर भी गुंडों ने हमला किया था। किसान आंदोलन पर भी कई बार गुंडों ने हमला किया। उन हमलों के बारे में भी कहा गया था कि वह जनता के क्रोध की अभिव्यक्ति है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय पर 2020 में गुंडों का हमला हुआ था।उसके पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज पर भी गुंडों ने हमला किया था। उसे भी राष्ट्रवादी क्रोध की अभिव्यक्ति बतलाया गया था।
ऐसा लगने लगा है कि भारत में पिछले 13 साल से गुंडों का राज चल रहा है। कभी ये गो रक्षक कहलाते हैं, कभी कांवड़िए, कभी राष्ट्रवादी। जनता के अलग-अलग हिस्सों के गुंडाकरण का जैसे अभियान चल रहा है।
मणिपुर में भाजपा के नेताओं की देखरेख में आरमबाई तेंगोल जैसे हथियारबंद गिरोह खड़े किए गए हैं। उन्हें मणिपुर के मैतेयी समाज का प्रतिनिधि बतलाया जा रहा है।
भाजपा जनता और गुंडों का अंतर ख़त्म कर रही है।
जो भारत की हिंदू जनता के बड़े हिस्से के गुंडाकरण का यह अभियान चला रहे हैं, वे देश का शासन भी चला रहे हैं। मंत्री, सांसद, विधायक और आर एस एस के पदाधिकारी, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा के नेता हैं।वे टी वी स्टूडियो में बैठे हैं, अख़बारों के संपादक और पत्रकार हैं, वे विश्वविद्यालयों के कुलपति और अध्यापक भी हैं। वे संस्कृतिकर्मी भी हैं, फ़िल्में बना रहे हैं। कुलपति खुलेआम ‘अर्बन नक्सल’ अध्यापकों और विद्यार्थियों के सफ़ाए का उकसावा देते हैं।
ये सब ख़ुद कभी सड़क पर उतरकर गुंडागर्दी नहीं करते। किसी पर हमला नहीं करते। ये शाखाएँ संचालित करते हैं। शिक्षा संस्थान चलाते हैं। लेख लिखते हैं, भाषण देते हैं और फ़िल्में बनाते हैं।क़ानून बनाते हैं। फिर उन क़ानूनों को लागू करने गुंडे ख़ुद तैयार हो जाते हैं! जैसे गो हत्या के ख़िलाफ़ क़ानून और उसकी आड़ में गो रक्षक गुंडे सड़क पर आते हैं, ये ‘लव जिहाद’ विरोधी क़ानून बनाते हैं और फिर गुंडे अंतरधार्मिक विवाह करनेवाले जोड़ों पर हमला करते हैं; ये धर्मांतरण विरोधी क़ानून बनाते हैं और फिर ईसाइयों पर हमला करनेवाले धर्मरक्षक गुंडे सक्रिय हो जाते हैं।
आप कह सकते हैं कि इस दिमाग़ी गुंडागर्दी के बिना सड़क की गुंडागर्दी संभव नहीं।
इस दिमाग़ी गुंडागर्दी का इलाज कौन करेगा और कैसे?