पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में मतदाता सूची से हटाए गए नाम क्या बड़ा फैक्टर बन सकते हैं? क्या इससे चुनाव परिणाम प्रभावित होंगे?
बंगाल मतदाता सूची से नाम काटे जाने पर विवाद
बंगाल चुनाव पर SIR का असर क्या होगा? आप खुद पढ़ लीजिए। मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज विधानसभा में 2021 में टीएमसी 26 हज़ार 379 वोट से जीती थी। अब SIR में 74 हज़ार 775 नाम काट दिए गए। नतीज़ा क्या होगा? लालगोला विधानसभा में 2021 में टीएमसी क़रीब 60 हज़ार 700 वोट से जीती थी। SIR में 55 हज़ार 420 नाम काट दिए गए। ये हालात उन जगहों का है जहाँ पहले चरण का मतदान पूरा हो गया।
पश्चिम बंगाल में गुरुवार को पहले चरण का मतदान ख़त्म हो गया, लेकिन बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि SIR प्रक्रिया में हटे नाम चुनाव नतीजों पर कितना असर डालेंगे? इस चरण में 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हुई। इन सीटों पर कुल 3.6 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। बाक़ी 142 सीटों पर दूसरे चरण में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। पूरे राज्य में कुल 6.82 करोड़ मतदाता हैं। लेकिन इस चुनाव की सबसे बड़ी बात मतदाता सूची से नाम हटाने की विवादास्पद प्रक्रिया है।
चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के तहत क़रीब 94 लाख वोटर कम हो गए हैं। SIR शुरू होने के बाद आई ड्राफ्ट लिस्ट में क़रीब 67 लाख कट गए थे। इसके बाद एडजुडिकेशन यानी जाँच के अधीन क़रीब 60 लाख मतदाताओं में से 27 लाख के नाम कट गए हैं। ये लोग वोटिंग का सबूत रखते हुए भी वोट नहीं डाल पाए। SIR का मकसद गलत या मृत मतदाताओं को हटाना था, लेकिन कई जगहों पर लंबे समय से वोट डाल रहे लोगों के नाम भी हट गए।
SIR से कितना असर पड़ा?
16 जिलों में गुरुवार को वोटिंग हुई। इनकी वोटिंग क्षमता SIR से पहले के मुक़ाबले 9.4% कम हो गई है। सबसे ज्यादा असर मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों पर पड़ा है।
- मुर्शिदाबाद- 7.4 लाख नाम हटे।
- मालदा- 4.5 लाख नाम हटे।
मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज विधानसभा क्षेत्र में तो 74 हज़ार 775 मतदाताओं यानी क़रीब 32% के नाम काट दिए गए। कई परिवारों के पूरे नाम एक साथ हट गए, जिससे लोग काफी नाराज हैं। चुनाव आयोग कहता है कि नाम हटाने में नाम की गलत स्पेलिंग, माता-पिता के सरनेम में मिसमैच जैसे लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी थे। लेकिन विपक्ष और प्रभावित लोग इसे गलत तरीके से नाम हटाना बता रहे हैं।
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4 विधानसभा क्षेत्रों की स्थिति
वैसे तो पूरे राज्य में एसआईआर में नाम कटे हैं, लेकिन चार विधानसभा क्षेत्रों की मिसाल से पूरी स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज विधानसभा क्षेत्र में 2021 में टीएमसी के अमीरुल इस्लाम 26,379 वोट से जीते थे। लेकिन इस बार SIR से 74,775 वोट कट गए। वोटर लिस्ट में 30% मतदाता कम हो गए। मुर्शिदाबाद की ही लालगोला विधानसभा सीट पर 2021 में TMC के मोहम्मद अली 60,700 से अधिक वोट से जीते थे। लेकिन अब SIR में 55,420 वोट कट गए।
मुर्शिदाबाद की ही भगवानगोला विधानसभा सीट पर 2021 में टीएमसी के इदरीस अली 1,06,000 से अधिक वोटों से जीते थे। लेकिन अब SIR से 47,493 वोट कट गए।
दक्षिण 24 परगना की मटियाबुर्ज विधानसभा सीट पर 2021 में टीएमसी के अब्दुल खालिक मोल्ला 75,000 से अधिक वोट से जीते थे। लेकिन इस बार SIR से 39,579 वोट कट गए।
बड़े नेताओं की किस्मत दांव पर?
पहले चरण में कई दिग्गज नेताओं की किस्मत आज तय होगी। इनमें तीन बड़े नाम हैं- शुभेंदु अधिकारी, दिलीप घोष और अधीर रंजन चौधरी। बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम सीट से लड़ रहे हैं। 2021 में उन्होंने यहां ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराया था। अब उनका मुकाबला अपने पुराने साथी और टीएमसी के पबित्र कर से है। पबित्र कर पहले शुभेंदु के करीबी थे और हिंदू संगठनों से भी जुड़े हैं। 2021 में उन्होंने शुभेंदु को बोयाल इलाके में 3500 वोटों की बढ़त दिलाई थी। इस बार मुकाबला कड़ा होने वाला है। शुभेंदु दूसरी सीट भवानीपुर से भी लड़ रहे हैं जहाँ उनका मुक़ाबला ममता बनर्जी से है।नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी
भाजपा नेता दिलीप घोष खड़गपुर सदर सीट से लड़ रहे हैं। 10 साल बाद वापसी कर रहे हैं। 2016 में उन्होंने यहां कांग्रेस के मंत्री को हराया था। इस बार टीएमसी के प्रदीप सरकार मुख्य चुनौती हैं। यहां भी SIR से 60,730 से ज्यादा नाम हटे हैं।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर सीट से लड़ रहे हैं। पांच बार सांसद रह चुके अधीर अब विधानसभा में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। यहां त्रिकोणीय लड़ाई है- भाजपा के मौजूदा विधायक सुब्रत मित्रा, टीएमसी के नारू गोपाल मुखर्जी और अधीर। बहरामपुर में 70% हिंदू मतदाता हैं, इसलिए कम्युनल पोलराइजेशन बड़ा मुद्दा है।
पहला चरण कितना अहम?
पहले चरण में मतदान होने वाले 16 जिलों में से कई उत्तर बंगाल और पुरुलिया-बांकुरा जैसे इलाके भाजपा के गढ़ रहे हैं। 2021 में बीजेपी को इनमें से 9 जिलों में 38 सीटें मिली थीं। इससे बीजेपी की कुल 77 सीटें हो गई थीं। बीजेपी SIR से नाम काटे जाने को अपने पक्ष में देख रही है। लेकिन मतदाताओं में नाराजगी साफ दिख रही है। पोलिंग बूथों के बाहर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। यह नाराजगी टीएमसी के पक्ष में एंटी-बीजेपी वोट में बदल सकती है।
पहले चरण में बीजेपी कितनी सीटें बचा पाती है और टीएमसी कितना इनको भुना पाती है, यह पूरे बंगाल की अगली सरकार की तस्वीर तय करेगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। फिलहाल, सारा ध्यान इस बात पर है कि मतदाता सूची से हटाए गए लाखों नामों का असर कितना पड़ेगा। क्या यह चुनाव का रुख बदल देगा?