मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक बार फिर कड़ा पत्र लिखा है। उन्होंने राज्य में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया को "मतदाताओं को जानबूझकर और गुप्त रूप से मताधिकार से वंचित करने की साजिश" करार दिया है।

यह पत्र शनिवार, 10 जनवरी 2026 को लिखा गया है, जो नवंबर 2025 के बाद से मुख्य चुनाव आयुक्त को ममता बनर्जी का चौथा पत्र है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि SIR की प्रक्रिया पूरी तरह यांत्रिक और तकनीकी आंकड़ों पर आधारित हो गई है, जिसमें मानवीय संवेदनशीलता, विवेक और मानवीय स्पर्श का पूरी तरह अभाव है।

ममता बनर्जी ने लिखा है कि इस SIR का उद्देश्य न तो रिकॉर्ड में सुधार करना है और न ही नए नाम जोड़ना, बल्कि केवल नाम काटना और मतदान से वंचित करना है। उन्होंने इसे "लोकतंत्र की जड़ों पर हमला" बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 94 लाख मतदाताओं में "तार्किक विसंगतियां (logical discrepancies)" पाई गई हैं, जो वास्तव में पूरी तरह से "अतार्किक" हैं और कुछ खास विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक पक्षपात के साथ चुनिंदा तरीके से लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

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प्रमुख आरोप और उदाहरण

ममता ने लिखा है- मामूली गलतियों जैसे वर्तनी त्रुटि या उम्र में मामूली अंतर के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इससे लोगों को सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है, जिससे उन्हें रोजगार में नुकसान, परेशानी और आर्थिक हानि हो रही है। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया - "क्या ऐसी मामूली विसंगतियां उत्पीड़न, असुविधा और दैनिक मजदूरी के नुकसान को जायज ठहराती हैं? इसका मुआवजा कौन देगा?"
मुख्यमंत्री ने लिखा है - नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, तृणमूल सांसद देव, क्रिकेटर मोहम्मद शमी और कवि जॉय गोस्वामी जैसे प्रमुख व्यक्तियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। इससे संस्थागत अहंकार का पता चलता है। पश्चिम बंगाल के लिए इस्तेमाल किया जा रहा पोर्टल अन्य राज्यों से अलग है। केस निपटारे के विकल्प बैकएंड में मनमाने ढंग से बदले जा रहे हैं, जिससे अधिकारी भ्रमित हैं।
ममता बनर्जी ने इसे "राजनीतिक पक्षपात और निरंकुश रवैये" का स्पष्ट उदाहरण बताया और कहा कि चुनाव आयोग, जो एक संवैधानिक संस्था है, अब "लोकतंत्र के लिए चिंताजनक स्तर" पर पहुंच गया है। उन्होंने अपने पत्र में हाथ से लिखा नोट भी जोड़ा - "हालांकि मुझे पता है कि आप जवाब नहीं देंगे या स्पष्टीकरण नहीं देंगे, लेकिन मेरा कर्तव्य है कि आपको सारी जानकारी दूं।"

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यह विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच तनाव को और बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री ने पहले भी 3 जनवरी के पत्र में SIR को "मज़ाक" करार दिया था और प्रक्रिया में खामियों को दूर करने या इसे रोकने की मांग की थी।

बंगाल के बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने अलग पत्र लिखकर SIR को जारी रखने की अपील की है, लेकिन ममता बनर्जी ने इसे लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बताया है। स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं कि चुनाव आयोग अब क्या कदम उठाता है।