आई-पैक पर ईडी छापेमारी मामले में ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है! कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया, जिसमें पार्टी ने आई-पैक के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय के छापे के दौरान कथित तौर पर जब्त किए गए राजनीतिक गोपनीय डेटा की सुरक्षा मांगी थी।

कोर्ट ने ईडी की ओर से दिए गए बयान को दर्ज किया कि छापेमारी के दौरान दोनों जगहों से कुछ भी जब्त नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि ईडी के वकील ने बताया, 'अधिकारियों ने उन दो जगहों से कुछ भी नहीं लिया।' जांच के दौरान बनाए गए दस्तावेजों यानी पंचनामा की कॉपी भी इसी बात की पुष्टि करती है कि आई-पैक के ऑफिस या प्रतीक जैन के घर से कोई सामान या डेटा जब्त नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि याचिका में अब कोई बात बाक़ी नहीं रह गई है, इसलिए इसे निपटा दिया गया।

क्या था टीएमसी का दावा?

टीएमसी ने कोर्ट में कहा था कि आई-पैक पार्टी की राजनीतिक सलाहकार फ़र्म है, जो चुनावी रणनीति बनाती है। पार्टी ने मांग की थी कि यदि कोई गोपनीय राजनीतिक डेटा या दस्तावेज जब्त हुए हैं तो उनकी सुरक्षा की जाए और उन्हें किसी और को न दिखाया जाए या न बाँटा जाए। टीएमसी ने कहा कि यह छापेमारी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की रणनीति को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।

ईडी ने क्या कहा?

ईडी ने टीएमसी की याचिका का विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि याचिका करने वाला व्यक्ति उन जगहों से जुड़ा नहीं था, जहाँ छापेमारी हुई। उसने कोई घटना खुद नहीं देखी और कोई ठोस जानकारी का स्रोत भी नहीं बताया। इसलिए याचिका सिर्फ अनुमान पर आधारित थी और इसे खारिज किया जाना चाहिए।

ईडी ने कहा कि 8 जनवरी को छापेमारी के दौरान कुछ भी नहीं लिया गया। ईडी के वकील ने यह भी दावा किया कि जो भी दस्तावेज या डिवाइस थे, वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा ले लिए गए थे। हालाँकि, कोर्ट ने मुख्य रूप से 'कुछ भी जब्त नहीं' वाले बयान पर ही याचिका निपटाई।

पूरा विवाद क्या है?

यह पूरा मामला 8 जनवरी 2026 को आई-पैक और प्रतीक जैन के घर पर ईडी की छापेमारी से जुड़ा है, जो कथित कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जाँच के तहत की गई थी। छापेमारी के दौरान काफी हंगामा हुआ था। छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और ईडी पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया। ईडी ने उल्टा आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और राज्य पुलिस ने जांच में बाधा डाली और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज व डिवाइस ले गए। इस मामले में ईडी ने अलग से हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं, जिसमें ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की गई है।

टीएमसी और ईडी की दलीलें

टीएमसी ने याचिका में कहा था कि अगर कोई डेटा जब्त किया गया है तो उसकी सुरक्षा की जाए, क्योंकि यह पार्टी के 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारी से जुड़ा गोपनीय राजनीतिक डेटा है। टीएमसी के वकील ने कोर्ट में कहा कि वे सिर्फ इतनी सी सीमित राहत मांग रहे हैं कि अगर कुछ जब्त हुआ है तो उसकी रक्षा हो। लेकिन ईडी ने कड़े शब्दों में विरोध किया और कहा कि याचिका बेबुनियाद है क्योंकि याचिकाकर्ता का छापेमारी वाली जगहों से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि याचिका में कोई व्यक्तिगत जानकारी या स्रोत नहीं दिया गया, इसलिए यह सिर्फ अनुमान पर आधारित है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी की याचिका को निपटाने के बाद ईडी की याचिका को स्थगित कर दिया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद इसे फिर से देखा जा सकता है।

वैसै, टीएमसी की याचिका खारिज होना तो उसके लिए झटका है, लेकिन एक तरह से उसके लिए राहत की बात भी है क्योंकि टीएमसी का कोई गोपनीय डेटा ईडी के पास नहीं गया और वह अब आश्वस्त हो सकती है!