टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने एक महीना पहले ही चंद्रिमा भट्टाचार्य की नियुक्ति की थी। उन्हें ममता के काफी नज़दीकी लोगों में माना जाता है। ममता को लगातार झटके लग रहे हैं। उनके कई विश्वसनीय लोग पार्टी छोड़कर चले गए हैं।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रहे बड़े आंतरिक संकट के बीच, पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार (4 जुलाई) को घोषणा की कि वे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) की चेयरपर्सन रहने के साथ-साथ अब पश्चिम बंगाल राज्य टीएमसी अध्यक्ष का कार्यभार भी खुद संभालेंगी। उन्होंने कहा- "AITC चेयरपर्सन के रूप में, मैं घोषणा करती हूं कि आज से मैं पश्चिम बंगाल राज्य टीएमसी अध्यक्ष की भूमिका भी संभालूंगी। इसके साथ ही दो अन्य नेताओं मदन मित्रा और कुणाल घोष को पार्टी की राज्य समिति में शामिल किया गया है। इन दोनों को इस समिति का महासचिव (General Secretary) नियुक्त किया गया है।"
इससे पहले वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने शनिवार (4 जुलाई 2026) को तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी गुट) के बंगाल प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। महज एक महीने पहले ही पार्टी के सांगठनिक फेरबदल के तहत उन्हें इस बड़ी जिम्मेदारी के लिए चुना गया था। चंद्रिमा भट्टाचार्य का यह फैसला तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है, जो पहले से ही 2026 के बंगाल विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद अंदरूनी संकट और गुटबाजी से जूझ रही है।
सभी पदों को छोड़ा, टीएमसी से रिश्ता खत्म होने की अटकलें
पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजे अपने त्याग पत्र में चंद्रिमा भट्टाचार्य ने न केवल प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ा है, बल्कि पार्टी के भीतर अपने सभी अन्य पदों से भी इस्तीफा दे दिया है। इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के साथ अपना पुराना नाता पूरी तरह से खत्म कर लिया है।इतना ही नहीं, इस अनुभवी नेता ने पार्टी के बैंक खातों के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) की भूमिका भी छोड़ दी है और चुनाव आयोग (Election Commission) के समक्ष ममता बनर्जी की अधिकृत प्रतिनिधि (Authorized Representative) के पद से भी इस्तीफा दे दिया है।
इस्तीफे के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य ने क्या कहा
इस्तीफा सौंपने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए भट्टाचार्य ने कहा, "ममता जी का मुझ पर जो विश्वास था, वह कमजोर होता हुआ लग रहा था। जब भरोसा और विश्वास ही नहीं रहा, तो एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में काम जारी रखना मुश्किल हो गया था... मैं कुणाल घोष का सम्मान करती हूँ, लेकिन मेरी वफादारी पर सवाल उठाने वाले वह कौन होते हैं और किस आधार पर? ममता बनर्जी जानती हैं कि मैं वफादार हूँ या नहीं।" उनकी यह टिप्पणी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों के कुछ घंटे बाद आई है। पार्टी के इस गुट ने उनके इस्तीफे को 'पहले से योजनाबद्ध' कदम बताया और आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के बढ़ते आंतरिक संकट के बीच उन्होंने निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट से हाथ मिला लिया है।
ममता बनर्जी के साथ चंद्रिमा भट्टाचार्य (बाएं)
भट्टाचार्य ने पत्रकारों को बताया कि उनका यह फैसला ममता बनर्जी के एक फोन कॉल के बाद आया, जिसमें कथित तौर पर उन पर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट को कोलकाता में पार्टी के मुख्यालय 'तृणमूल भवन' पर कब्जा करने देने का आरोप लगाया गया था।
भट्टाचार्य ने कहा, "मुझे तब बहुत दुख हुआ जब उन्होंने (ममता बनर्जी) मुझे फोन करके कहा कि मैंने पार्टी कार्यालय उन्हें (बागियों को) सौंप दिया है, जबकि मुझे नहीं पता कि मैंने ऐसा कैसे किया। यह साफ है कि मेरी वफादारी और विश्वसनीयता की जड़ें हिल गईं। अतीत में ऐसा कभी नहीं हुआ था। एक बार जब वे बुनियादी बंधन खत्म हो जाते हैं, तो मेरे लिए पार्टी में रहने या उसमें वापस लौटने का कोई कारण नहीं बचता।" हालांकि, मीडिया से बात करने के कुछ ही देर बाद भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के नेताओं के साथ बैठक करते देखा गया, जहाँ विपक्ष के उपनेता संदीपन साहा ने उनका स्वागत किया।
केवल एक महीने पहले मिली थी कमान
गौर करने वाली बात यह है कि चंद्रिमा भट्टाचार्य को ठीक एक महीने पहले, 5 जून 2026 को ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर हुई तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में बंगाल का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने वरिष्ठ नेता सुब्रत बख्शी की जगह ली थी। पार्टी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी थी।चंद्रिमा भट्टाचार्य का राजनीतिक सफर
पूर्व कैबिनेट मंत्री: वह ममता बनर्जी सरकार में एक कद्दावर मंत्री रही हैं और उन्होंने वित्त (Finance) तथा स्वास्थ्य (Health) जैसे महत्वपूर्ण विभागों में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया है। महिला विंग की कमान: वह लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस की महिला विंग की प्रमुख और एक प्रखर चेहरा रही हैं। तीन बार विधायक रह चुकीं चंद्रिमा भट्टाचार्य को 2026 के हालिया बंगाल विधानसभा चुनाव में दमदम उत्तर (Dum Dum Uttar) सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार सौरव सिकदर के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।क्यों गहराया संकट?
2026 के बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर ममता बनर्जी गुट और पार्टी के अन्य धड़ों के बीच खींचतान की खबरें सामने आ रही थीं। चंद्रिमा भट्टाचार्य का अचानक इस तरह से सारे महत्वपूर्ण पदों और सांगठनिक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे देना इस बात का साफ संकेत है कि पार्टी के भीतर का संकट बेहद गहरा हो चुका है। फिलहाल इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व या ममता बनर्जी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।ममता ने दी सलाह- टीएमसी तोड़ने की बजाय बीजेपी में जाओ
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को चंद्रिमा के इस्तीफे के बाद फेसबुक लाइव में कहा कि ये लोग पार्टी तोड़ने की बजाय बीजेपी में शामिल क्यों नहीं हो जाते। क्या आपको लगता है कि मैं मर गई हूं? क्या टीएमसी कार्यकर्ता मर चुके हैं? जो लोग छोड़कर गए हैं, उनके पास बचाने के लिए बहुत सारा सामान और संपत्तियां थीं। हमें टीएमसी परिवार को बचाना है।" बागी नेताओं द्वारा कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (TMC) मुख्यालय पर "कब्जा" करने के एक दिन बाद और पार्टी की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद, टीएमसी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक वीडियो संबोधन में पार्टी के बागियों पर निशाना साधा। उन्होंने उन्हें गद्दार करार देते हुए कहा कि वह नेताओं से ज्यादा कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देती हैं।
पूर्व राज्य पार्टी अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य के पार्टी छोड़ने पर, पूर्व सीएम ने कहा, "उन्होंने मुझे कुछ दिन पहले बताया था कि वह इस्तीफा दे देंगी। उससे पहले, उनके बेटे ने (बागी विधायकों) से हाथ मिला लिया था। मुझे कोई परवाह नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "(विधानसभा चुनावों को) अभी सिर्फ दो महीने हुए हैं। आपके पास इतना कम धैर्य है। आप 15 साल तक विधायक और मंत्री रहे। अब आप बागी बन गए हैं। चुनाव से पहले आप बागी क्यों नहीं थे?"