TMC विधायकों के जाली हस्ताक्षर से जुड़े मामले में मंगलवार को CID अधिकारी ममता बनर्जी के आवास पर पहुँचे। अधिकारियों ने ममता बनर्जी के आवास को इसलिए चुना क्योंकि वहाँ TMC पार्टी का कार्यालय भी है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारी आवास के अंदर जाना चाहते थे, लेकिन TMC नेताओं ने उन्हें रोक दिया और कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों ही वहाँ मौजूद नहीं हैं। इस बीच, किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री के घर के सामने केंद्रीय बलों की एक बड़ी टुकड़ी तैनात की गई है।

अभिषेक बनर्जी के दफ्तर पर भी सीआईडी पहुंची

सूत्रों के अनुसार, यह टीम उस पते पर पहुँची, जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) का केंद्रीय कार्यालय भी है, ताकि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को औपचारिक नोटिस दिया जा सके। CID अभी एक ऐसे मामले की जांच कर रही है जिसमें एक पत्र और उसके साथ बैठक के प्रस्ताव रजिस्टर पर जाली हस्ताक्षर पाए गए थे। चूँकि विवादित दस्तावेज़ पर विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे जाने से पहले अभिषेक बनर्जी ने हस्ताक्षर किए थे, इसलिए CID अधिकारियों ने इस मामले में उनकी भूमिका के बारे में उनसे पूछताछ करने का फैसला किया है।
हस्ताक्षर में जालसाजी के मामले में CID की एक और टीम तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय पहुँची है।

ममता-अभिषेक दिल्ली में

ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली गए हुए हैं। दोनों ने सोमवार को इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा लिया था। ममता ने मंगलवार को कांग्रेस की चेयरपर्सन सोनिया गांधी से मुलाकात की। 
मिली जानकारी के मुताबिक, कालीघाट में दोपहर को अचानक टीएमसी कार्यालय पहुंची। जांच अधिकारियों के इमारत के भीतर प्रवेश करने को लेकर वहां मौजूद टीएमसी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाशीष चक्रवर्ती के साथ सीआईडी अधिकारियों की तीखी बहस (Verbal Altercation) भी हुई, जिससे परिसर में कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
इस कथित धोखाधड़ी और फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच में सीआईडी के इस दौरे को एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम इस विवाद से जुड़े सबूत जुटाने और महत्वपूर्ण जानकारियों को सत्यापित करने के उद्देश्य से वहां पहुंची थी।

टीएमसी ने सीआईडी भेजने की निन्दा की

टीएमसी सांसद और राज्यसभा में टीएमसी के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बदले की कार्रवाई, जिसका समय बहुत ही बेशर्मी से चुना गया! ठीक उसी समय जब दिल्ली में टीएमसी की चेयरपर्सनममता बनर्जी श्रीमती सोनिया गांधी के साथ बैठक कर रही थीं, कोलकाता में CID जबरदस्ती AITC पार्टी के हेडक्वार्टर (जो उनके आवास से सटा हुआ है) में घुसने की कोशिश कर रही थी। पहले वोट लूटे, अब राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की फाइलें लूट रहे हैं। क्या यही लोकतंत्र है?
मुख्य प्रवेश द्वार CRPF से भरा हुआ है।

कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों को गद्दार और देशद्रोही कहा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कल्याण बनर्जी ने कहा, बागी सांसदों को गद्दार कहा। कल्याण ने कहा- "जैसे ही वे भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के घर गए, वे भाजपा के साथ हो गए। उन्होंने ममता बनर्जी को छोड़कर नरेंद्र मोदी को अपना नेता बना लिया है।" उन्होंने बागी सांसदों पर पार्टी कार्यकर्ताओं को छोड़कर सत्ता के सुख भोगने का आरोप लगाया।कल्याण बनर्जी ने विद्रोही सांसद शर्मिला सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरजी कर अस्पताल विवाद के दौरान उनके चुप रहने पर सवाल उठाया और कहा, "आरजी कर मुद्दे पर शर्मिला सरकार और काकोली दस्तीदार कहां थीं? मैं बोल रहा था।" डॉक्टर शर्मिला सरकार पर ड्यूटी न निभाने का आरोप लगाया गया।

कल्याण बनर्जी ने बागियों को इस्तीफा देकर जनता के सामने जाने की चुनौती दी।

टीएमसी में विद्रोह के नए संकेत

टीएमसी सांसद जून मालिया और देव (देब अधिकारी) मंगलवार को भाजपा के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कोलाघाट में प्रशासनिक बैठक में पहुंचे। यह पार्टी में बढ़ते दरार का ताजा संकेत है। टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल ने बताया कि बागियों ने उन्हें दिल्ली बुलाने के लिए फोन किया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वे ममता बनर्जी के साथ ही रहेंगी।

ममता के समर्थन में कीर्ति आजाद

पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए कहा, "घायल शेरनी सबसे ज्यादा खतरनाक होती है।" उन्होंने ममता को संकट से और मजबूत होकर उभरने का भरोसा जताया। आजाद ने काकोली घोष दस्तीदार पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने कई चुनाव हारे थे, फिर भी ममता ने उन्हें लोकसभा टिकट दी। उन्होंने काकोली पर संसद से अनुपस्थित रहने और फैसले न ले पाने का आरोप लगाया।
यह संकट पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी हार के बाद सामने आया है, जिसमें भाजपा ने भारी बहुमत हासिल किया। ममता बनर्जी खुद अपनी सीट भवानीपुर से शुभेंदु अधिकारी से हार गईं। पार्टी में अब ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। विद्रोही विधायकों और सांसदों का एक बड़ा वर्ग असंतोष जता रहा है।

काकोली घोष का अभी भी 20 सांसदों के समर्थन का दावा

टीएमसी में विद्रोह की आंच बढ़ती जा रही है। लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि करीब 20 टीएमसी सांसदों ने फैसला कर लिया है कि वे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करेंगे। विद्रोही खेमा काकोली घोष दस्तीदार को अभी भी पार्टी का चीफ व्हिप मानता है, जिससे संसदीय नेतृत्व पर बड़ा संघर्ष खड़ा हो गया है।