एसआईआर की वजह से चुनाव आयोग की फिर से किरकिरी हो गई। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर में नोटिस भेजे जाने की ख़बर ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया। सोशल मीडिया पर लोग चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ टूट पड़े। टीएमसी ने चुनाव आयोग पर हमला करते हुए कहा कि क्या बंगाली होने की वजह से उनको सुनवाई का ऐसे नोटिस भेजा गया है जैसे कि वह कोई अपराधी हों। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारी दबाव के बाद चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि सेन को सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से आने की ज़रूरत नहीं है। यह मामला प्रशासनिक स्तर पर ही सुलझा लिया जाएगा। हालाँकि, इस बीच बुधवार को सेन के शांतिनिकेतन स्थित पैतृक घर पर नोटिस पहुंचा दिया गया।

इस नोटिस में लिखा है, 'आपके घोषणापत्र के अनुसार, आपके और आपके माता-पिता के बीच आयु का अंतर 15 वर्ष से कम है, जो कि सामान्यतः अपेक्षित नहीं है और इसलिए पिछले एसआईआर और मतदाता सूची के संदर्भ में इसे दस्तावेजों के माध्यम से स्पष्ट करने की ज़रूरत है।' इसमें यह भी लिखा गया है कि सुनवाई 16 जनवरी को 12 बजे उनके घर पर ही होगी। इस नोटिस को तृणमूल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स खाते पर साझा किया है।
टीएमसी ने कहा है, 'एक नोबेल पुरस्कार विजेता पर कोई शक नहीं होना चाहिए, है कि नहीं? लेकिन क्या होगा अगर वह बंगाली हो? तो उसे ऐसे नोटिस भेजे जाएंगे जैसे वह कोई अपराधी हो।'

पार्टी ने आगे कहा है, 'अमर्त्य सेन के ज़बरदस्त काम आधुनिक इकोनॉमिक्स की नींव हैं, उन्होंने बंगाल और पूरे देश को बेमिसाल गौरव दिलाया है और उनके विचारों को दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ा जाता है, फिर भी उन्हें एसआईआर सुनवाई का नोटिस जारी किया गया है।'

टीएमसी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि 'यह बीजेपी और चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया का घटिया, शर्मनाक नाटक है। वे हमारे आइकनों को कीचड़ में घसीटेंगे, हमारे गौरव को खराब करेंगे और अगर इससे उनके बंगाल-विरोधी बँटवारे और अपमान के एजेंडे को फ़ायदा होता है तो वे किसी भी हद तक गिर जाएँगे।'
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मोदी को खुश करने में जुटे हैं ज्ञानेश कुमार: कांग्रेस

कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की है और कहा है, 'एसआईआर की धांधली को समझिए। चुनाव आयोग ने नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को अपनी नागरिकता साबित करने को कहा है। बाकायदा इसके लिए उन्हें नोटिस भेजा गया है। ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की साख पर बट्टा लगा दिया है, वो भी सिर्फ इसलिए कि उन्हें अपने मालिक मोदी को खुश करना है। अमर्त्य सेन को नोटिस भेजना दुखद है। चुनाव आयोग और नरेंद्र मोदी को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।'

क्या है मामला?

चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की विशेष गहन जांच यानी एसआईआर कर रहा है। इस दौरान कई नामों में तकनीकी गड़बड़ियाँ पाई गईं। अमर्त्य सेन के नाम में स्पेलिंग की छोटी गलती या उनके और उनकी मां की उम्र में अंतर जैसी 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' मिली। 
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पहले तो मीडिया में सूत्रों के हवाले से ख़बर आई कि चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, 'यह सिर्फ तकनीकी गलती है। इससे वोटर की योग्यता पर कोई असर नहीं पड़ता। बूथ लेवल ऑफिसर इसे प्रशासनिक तरीके से ठीक कर सकते हैं। हमने निर्देश दिए हैं कि ऐसी छोटी दिक्कतों को बिना विवाद के सुलझाया जाए।' यह भी कहा गया कि आयोग ने साफ़ किया कि 85 साल से ज़्यादा उम्र के बुजुर्गों को सुनवाई केंद्र पर आने की ज़रूरत नहीं है। उनके मामले में चुनाव पंजीयन अधिकारी घर पर जाकर या अन्य तरीके से सुलझा सकते हैं।

सोशल मीडिया पर ECI की आलोचना

इस ख़बर पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई और लोगों ने चुनाव आयोग को भला-बुरा कहा। वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह ने लिखा, 'अमर्त्य सेन को एसआईआर नोटिस! शर्म करो चुनाव आयोग।'
लोक गायिका नेहा सिंह राठौड़ ने लिखा, 'नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को चुनाव आयोग ने SIR से जुड़ा नोटिस भेजा है। जाहिलों, धूर्तों और सांप्रदायिक लोगों पर मेहरबान रहने वाली सरकार विद्वानों को पसंद नहीं करती है।

विक्रम नाम के यूज़र ने लिखा है, 'अब नोबेल पुरस्कार विजेता और देश की शान अमर्त्य सेन को भी नागरिकता का सबूत देने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं? आनन-फानन में की गई एसआईआर प्रक्रिया ने चुनाव आयोग की शाख को गर्त में धकेल दिया है। सोचिए कि जो व्यक्ति नोबेल पुरस्कार जीत चुका है, उनको भी अब यह झेलना पड़ रहा है। अत्यंत दुखद।'
यह घटना चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर सवाल उठा रही है। आलोचक कह रहे हैं कि इतने बड़े सम्मानित व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार दिखाता है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में दूरदर्शिता की कमी है। कुछ लोग इसे राजनीतिकरण बता रहे हैं, खासकर बंगाल में जहां टीएमसी और बीजेपी के बीच तनाव है।

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग का कहना है कि यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी को निशाना नहीं बनाया जा रहा। लेकिन अमर्त्य सेन जैसे व्यक्ति का नाम आने से मामला सुर्खियों में आ गया।