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बंगाल चुनाव : पहले चरण में कितनी सीटों पर भगवा फहराएगी बीजेपी?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में 200 से ज़्यादा सीटें जीतने के बीजेपी के दावे में कितना दम है? क्या भगवा पार्टी उसके आसपास भी पहुँच पाएगी या वह सिर्फ हवा बनाने की फिराक में है? शुभेंदु अधिकारी का कुनबा तृणमूल कांग्रेस को कितन नुक़सान पहुँचा पाएगा? इन सवालों के जवाबों का अनुमान थोड़ा बहुत ही सही, कल यानी शनिवार को लग जाएगा जब पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान होगा। 

आठ चरणों में बँटे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के पहले चरण के लिए प्रचार कार्य गुरुवार की शाम खत्म हो गया। इसके साथ ही यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के ज़ोरदार प्रचार कार्यों के बल पर इन चरण की 30 सीटों में से कितने पर बीजेपी क़ब्ज़ा कर पाएगी। पिछली बार इन 30 सीटों में से एक पर भी बीजेपी को कामयाबी नहीं मिली थी, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 27 सीटें हासिल हुई थीं। 

यह सवाल इसलिए भी अहम है कि पुरुलिया में अमित शाह की दो आमसभाएं अंतिम समय में रद्द कर दी गई थीं। बीजेपी ने एक में हेलीकॉप्टर में तकनीकी ख़राबी होने और दूसरे में समर्थकों को जाने से रोकने की बात कही थी, पर स्थानीय अख़बारों में छपी खबरों में कहा गया था कि लोगों के नहीं आने से वे सभाएं रद्द कर देनी पड़ी थी। प्रधानमंत्री की पुरुलिया रैली में भी अपेक्षित भीड़ नहीं उमड़ी थी। 

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कम से कम जिन सीटों पर पहले चरण में मतदान होने को है, वे बीजेपी के लिए बहुत आसान नहीं हैं और पार्टी के 200 से अधिक सीटें जीतेने के दावे से बिल्कुल मेल नहीं खाती हैं। 

30 में से बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिली थी

बाँकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम, पूर्व मेदिनीपुर व पश्चिमी मेदिनीपुर के कुछ इलाक़ों की 30 सीटों पर मतदान होना है। पिछली बार इनमें से वाम मोर्चा के घटक रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) को एक और कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं, बाकी की 27 सीटें तृणमूल कांग्रेस की झोली में गई थीं। बीजेपी का कोई नहीं जीता था। 

पूर्व मेदिनीपुर व पश्चिमी मेदिनीपुर ही नहीं, पुरुलिया, झाड़ग्राम भी वे इलाक़े हैं, जहाँ से तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने बड़े पैमाने पर पार्टी छोड़ कर बीजेपी का दामन थामा है। 
पूर्व मेदिनीपुर व पश्चिमी मेदिनीपुर को शुभेंदु अधिकारी का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। यह देखना दिचस्प होगा कि वे पहले चरण के मतदान में पड़ने वाली इस क्षेत्र की कितनी सीटों का नतीजा प्रभावित करते हैं।

पुरुलिया

पहले चरण के मतदान में पुरुलिया की स्थिति मज़ेदार है, जहाँ मौजूदा कांग्रेस विधायक सुदीप मुखर्जी ने चुनाव के पहले पाला बदल लिया और बीजेपी में शामिल हो गए। उस समय उन्हें 44.58 प्रतिशत वोट मिले थे और उन्होंने टीएमसी के ज्योति प्रसाद सिंह देव को हराया था। 

सुदीप मुखर्जी इस बार बीजेपी की ओर से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से पार्थ प्रतिम बनर्जी और कांग्रेस के सुजय बनर्जी मैदान में हैं। 

बाघमुंडी

पिछली बार बाघमुंडी से कांग्रेस के उम्मीदवार चुने गए थे और टीएमसी दूसरे नंबर पर थी। इस बार दो बार के विधायक नेपाल चंद्र महतो कांग्रेस की ओर से मैदान में हैं तो टीएमसी के उम्मीदवार सुशांत महतो हैं। बीजेपी ने यह सीट ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन के लिए छोड़ी है, जिसकी ओर से आशुतोष महतो मैदान में है। साल 2016 के चुनाव में यहाँ से बीजेपी को सिर्फ 5.96 प्रतिशत वोट मिले थे। 

बाघमुंडी सीट की दिलचस्प बात है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के ज्यतिर्मय महतो ने पुरुलिया सीट जीती थी, यह विधानसभा सीट उस लोकसभा सीट का ही हिस्सा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी क्या गुल खिलाती है।

खड़गपुर

खड़गपुर उस लोकसभा सीट का हिस्सा है, जहाँ से 2019 में पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष चुने गए थे। बीजेपी ने तपन भुइयां को मैदान में उतारा है। टीएमसी ने मौजूदा विधायक दिनेन राय को ही एक बार फिर चुनाव में उतारा है। लेकिन यहां से सीपीआईएम के शाहजहाँ अली भी मैदान में हैं। 

first phase of west bengal assembly election 2021 will BJP gain - Satya Hindi
दिलीप घोष, अध्यक्ष, बीजेपी, पश्चिम बंगाल

दिलीप घोष की जीत से यह तो साफ़ है कि इस इलाक़े में बीजेपी का असर बढ़ा है, लेकिन विधानसभा चुनाव के मुद्दे अलग होते हैं। बहुत कुछ इस पर भी निर्भर करता है कि सीपीआईएम के शाहजहाँ अली सरकार विरोधी वोटों को अपनी ओर खींच पाते हैं या नहीं। 

मेदिनीपुर

बांग्ला फ़िल्मों की अभिनेत्री जून मालिया पर इस बार सबकी निगाहें इसलिए नहीं टिकी हैं कि उनकी कोई फ़िल्म रिलीज हो रही है, बल्कि इसलिए कि वह मेदिनीपुर से तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार हैं। 

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जून मालिया, अभिनेत्री व बीजेपी उम्मीदवार

तृणमूल कांग्रेस ने इसके पहले भी फ़िल्म कलाकारों को उतारा है और तापस पाल से लेकर देबश्री राय तक ने राजनीति में अपनी जगह बनाई है। पिछली बार यह सीट तृणमूल ने ही जीती थी, लेकिन इस बार मौजूदा विधायक मृगेन्द्र नाथ माइती के बदले जून मालिया को मौका मिला है। 

खेजुरी

पूर्व मेदिनीपुर की खेजुरी सीट पर पिछली बार तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की थी, लेकिन सबकी निगाह इस ओर इसलिए है कि कुछ दिन पहले कांथी के सांसद शिशिर अधिकारी ने टीएमसी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए थे। 

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यह सुरक्षित सीट कांथी लोकसभा सीट का हिस्सा है। शिशिर अधिकारी मनमोहन सिंह सरकार में छह साल तक मंत्री रह चुके हैं और किसी समय ममता बनर्जी के नज़दीक रहे शुभेन्दु अधिकारी के पिता हैं। तृणमूल कांग्रेस से पार्थ प्रतिम दास और बीजेपी से शांतनु प्रमाणिक उम्मीदवार हैं। 

टीएमसी का कितना बड़ा समर्थक समूह शिशिर अधिकारी के साथ चला गया, इसका अंदाज इस सीट के नतीजे से लग जाएगा। चार बार के सांसद शिशिर बाबू की असली परीक्षा यही है।

सीपीआईएम ने हिमांशु दास को यहाँ मैदान में उतारा है। 

दागी उम्मीदवार भी हैं मैदान में

पहले चरण की 30 सीटों में से कुछ ऐसी हैं, जहाँ पिछली बार वोटों का अंतर बहुत ही कम था। इसके अलावा बीजेपी के कारण राजनीतिक समीकरण भी बदला हुआ है। लिहाज़ा, यह कहना मुश्किल है कि कौन जीतेगा। पुरुलिया में कांग्रेस के सुदीप मुखर्जी 4,991 वोट तो छातना में आरएसपी के धीरेंद्र नाथ लायक 2,417 वोटों के अंतर से जीते थे। 

एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स के अनुसार, पहले चरण की जिन 30 सीटों पर मतदान होने हैं, उनमें से 10 सीटों पर पाँच से अधिक उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं। खेजुरी में सबसे ज़्यादा 34 दागी उम्मीदवार हैं। इसके अलावा सालबोनी में 20, खड़गपुर में 16 और गड़बेता में 8 उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं। 

इन 30 सीटो पर चुनाव लड़ने वालों में से 10 प्रतिशत यानी 19 उम्मीदवार करोड़पति हैं। दूसरी ओर चार ने कहा है कि उनके पास कोई जायदाद नहीं है। 

वोटों की गिनती 2 मई को है। 

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