पूर्व सीएम ममता बनर्जी चुनावी नतीजों को चुनौती देने वाली अपनी इस याचिका की पुष्टि करने के लिए खुद कलकत्ता हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में मौजूद रहीं।अभी शुभेंदु अधिकारी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने ममता को हराया है।
ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनावी नतीजों को चुनौती देते हुए मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अदालत में एक चुनाव याचिका (Election Petition) दायर की है, जिसमें बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी की जीत को चुनौती दी गई है।
आधिकारिक मतगणना के अनुसार, इस सीट पर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 मतों के अंतर से शिकस्त दी थी। तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी चुनावी नतीजों को चुनौती देने वाली अपनी इस याचिका की पुष्टि (Affirm) करने के लिए खुद कलकत्ता हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में पहुंचीं।
भवानीपुर में मतदान वाले दिन बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप तृणमूल कांग्रेस ने लगाया था। टीएमसी समर्थक मतदाताओं को उनके इलाके में ही रोक दिया गया था। वहां पर केंद्र सरकार के अधीन अर्ध सैनिक बल तैनात तैनात कर दिए गए थे। कुछ स्थानों पर ईवीएम को लेकर काफी शिकायतें आई थीं। राज्य के चुनावों में भाजपा की बड़ी जीत के बाद, शुभेंदु अधिकारी बाद में बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने, जैसा कि पार्टी द्वारा दावा किया गया है।
वोटों की लूट और गड़बड़ी का आरोप
4 मई को चुनाव परिणाम आने के अगले ही दिन ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर एक संवाददाता सम्मेलन किया था। उसमें उन्होंने दावा किया था कि टीएमसी चुनाव नहीं हारी है। ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था, "उन्होंने (भाजपा) जबरन वोटों की लूट की है।" अपनी हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में भी उन्होंने मतगणना प्रक्रिया में विसंगतियों (Discrepancies) और गड़बड़ी का दावा किया है।शुभेंदु अधिकारी पर 'भ्रष्ट आचरण' का आरोप
अदालत में दायर अपनी याचिका में टीएमसी प्रमुख ने शुभेंदु अधिकारी पर पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट, 1951 (जनप्रतिनिधित्व अधिनियम) की धारा 123 के तहत 'भ्रष्ट आचरण' करने का आरोप लगाया है। याचिका के अनुसार, अधिकारी पर चुनाव के दौरान "रिश्वतखोरी, अनुचित प्रभाव डालने और दुश्मनी व नफरत फैलाने" जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।नंदीग्राम के बाद यह दूसरा मामला
यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने चुनावी नतीजों को कानूनी रूप से चुनौती दी है। इससे पहले साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भी जब वह नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी से बेहद कड़े मुकाबले में (1,956 वोटों से) हार गई थीं, तब भी उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 2021 का वह मामला अब भी अदालत में लंबित है, जिसमें पहले सुनवाई करने वाले जस्टिस कौशिक चंद्रा ने ममता बनर्जी की आपत्ति के बाद खुद को केस से अलग कर लिया था और टीएमसी प्रमुख पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।हुमायूं कबीर उपचुनाव में ममता का समर्थन करने को तैयार
AJUP अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने मंगलवार को कहा कि अगर ममता बनर्जी रेजीनगर विधानसभा सीट या बशीरहाट लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का फ़ैसला करती हैं, तो वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) का समर्थन करेंगे। रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं क्योंकि मौजूदा विधायक हुमायूं कबीर ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में दो सीटें जीती थीं और कानून के मुताबिक उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। कबीर ने मंगलवार को कहा, "उन्हें (ममता) यह तय करना होगा कि वह चुनाव लड़ना चाहती हैं या नहीं। अगर उन्हें मेरे समर्थन की ज़रूरत होगी, तो मैं उनका समर्थन करूंगा। अगर वह रेजीनगर से चुनाव लड़ती हैं, तो मैं उनकी जीत में मदद करने के लिए हर संभव कोशिश करूंगा। अगर वह बशीरहाट से चुनाव लड़ती हैं और मेरा समर्थन मांगती हैं, तो मैं उनके ख़िलाफ़ कोई उम्मीदवार नहीं उतारूंगा।" मौजूदा सांसद हाजी शेख़ नूरुल इस्लाम के निधन के कारण बशीरहाट लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव होने हैं।