पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मालदा के मोठाबाड़ी में न्यायिक अधिकारियों को घेरे जाने के मामले में केंद्र की एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि असली अपराधी तो भाग निकले, लेकिन अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए के नाम पर निर्दोष लोगों को परेशान किया जा रहा है।
कुछ दिन पहले मोठाबाड़ी में एक प्रदर्शन के दौरान सात न्यायिक अधिकारी बीडीओ कार्यालय में घिर गए थे। एक अन्य अधिकारी को कई घंटों तक गाड़ी में बंद रखा गया। प्रदर्शन हिंसक हो गया, सड़कें जाम की गईं, गाड़ियों को नुक़सान पहुँचाया गया और पुलिस पर हमला किया गया। इस घटना को लेकर ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच एक जुबानी जंग चल रही है। 
अब ममता बनर्जी ने मणिकचक में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, 'दो सांप्रदायिक पार्टियों ने जजों को घेरा और फिर भाग गए। अब जांच के नाम पर निर्दोष स्थानीय लोगों को परेशान किया जा रहा है। एनआईए के नाम पर करीब 50 निर्दोष लोगों को उठाया गया है।' ममता ने भारतीय सेकुलर फ्रंट यानी आईएसएफ़ और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम को सांप्रदायिक पार्टी क़रार दिया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच NIA को

मोठाबाड़ी हिंसा की जांच अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एनआईए को सौंप दी गई है। राज्य की सीआईडी यानी क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट ने अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। लेकिन ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि असली दोषी बच निकले और अब बेकसूर लोग फंसाए जा रहे हैं।

वोटर लिस्ट से नाम काटने का मुद्दा

रैली में ममता बनर्जी ने लोगों से पूछा कि जिनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है, वे हाथ उठाएँ। बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने हाथ उठाया। ममता ने कहा, 'अब हमें अपनी पार्टी की रैलियां या मीटिंग करने की ज़रूरत नहीं है। मेरी पहली प्राथमिकता उन लोगों की मदद करना है जिनके नाम गलती से वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। वे ट्रिब्यूनल में अप्लाई करें, ताकि उनका नाम फिर से जोड़ा जा सके।' उन्होंने लोगों को चेतावनी दी कि वे इस मामले से जुड़े न्यायिक अधिकारियों के पास न जाएं। इसके बजाय सीधे ट्रिब्यूनल में अर्जी दें।
ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें 'मोटाभाई' कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा, 'मैं अमित शाह को चुनौती देती हूं- वे मालदा आएं और जिन लोगों के नाम काटे गए हैं, उनसे बात करें। भाजपा को लोगों के पैरों पर गिरकर माफी मांगनी चाहिए। इस दुख के लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। मैं लोगों से कहती हूं कि वोटर लिस्ट से नाम काटने का बदला ईवीएम में लें।'

हिंसा भड़काने की साजिश का आरोप

ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी कि वे किसी भी उकसावे में न आएं। उन्होंने कहा, 'बीजेपी हिंसा भड़काना चाहती है, फिर मोठाबाड़ी की तरह केंद्र की एजेंसियों का इस्तेमाल करके लोगों को उठाना चाहती है। इसलिए सतर्क रहें, कोई उकसावे में न आएं।'
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव से पहले राज्य में पैसे लाए जा रहे हैं। महिलाओं से अपील की कि वोटिंग के बाद वे ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की सुरक्षा करें।

वक्फ संशोधन कानून पर ममता का बयान

गजोल में दूसरी रैली में ममता बनर्जी ने वक्फ संशोधन अधिनियम पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग वक्फ एक्ट के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं। याद रखिए, हमने इसका विरोध किया था और अब मामला इमामों के हाथ में है। हमने भाजपा को इस मामले पर कब्जा नहीं करने दिया।'
बता दें कि अप्रैल 2025 में मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ कानून को लेकर हिंसा हुई थी। बाद में राज्य सरकार ने कानून लागू करने पर सहमति जताई और 82000 से ज्यादा वक्फ प्रॉपर्टी का डेटा केंद्र के UMEED पोर्टल पर अपलोड करने को कहा था।