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बंगाल: शुभेंदु के इस्तीफ़े से ममता को झटका

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बागी तेवर दिखा रहे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने अब परिवहन मंत्री पद से भी इस्तीफ़ा दे दिया है। इससे पहले गुरुवार को उन्होंने हुगली रिवर ब्रिज कमिश्नर (एचआरबीसी) के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिया था। ममता बनर्जी ने सांसद कल्याण बनर्जी को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया था। 

मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद शुभेंदु के जल्दी ही विधानसभा और टीएमसी की सदस्यता से इस्तीफ़ा देने के कयास लगाए जा रहे हैं।

suvendu adhikari resigned from mamta cabinet - Satya Hindi

मनाने की कोशिश हुई थी

मेदिनीपुर में खासा राजनीतिक असर रखने वाले शुभेंदु का इस्तीफ़ा ममता बनर्जी के लिए करारा झटका माना जा रहा है। ममता ने हाल ही में उन्हें मनाने की कवायद शुरू की थी। शुभेंदु ने न तो चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से मुलाकात की थी और न ही दूसरे नेताओं से। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने इसी सप्ताह उनके घर जाकर बातचीत भी की थी। लेकिन बात नहीं बनी।

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शुभेंदु बीते तीन महीनों से न तो कैबिनेट की किसी बैठक में हिस्सा ले रहे थे और न ही अपने जिले में तृणमूल की ओर से आयोजित किसी कार्यक्रम में। इसके उलट वे दादार अनुगामी यानी दादा के समर्थक नामक एक संगठन के बैनर तले लगातार रैलियाँ और सभाएं कर रहे थे। 
शुभेंदु मेदिनीपुर जिले की उस नंदीग्राम सीट से विधायक हैं जिसने वर्ष 2007 में जमीन अधिग्रहण के ख़िलाफ़ हिंसक आंदोलन के जरिए सुर्खियां बटोरी थीं और टीएमसी के सत्ता में पहुंचने का रास्ता साफ किया था।

प्रशांत किशोर, अभिषेक से थे नाराज़

दरअसल, कभी दीदी के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाने वाले शुभेंदु चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और ममता के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी से काफी नाराज हैं। उन्होंने अपने करीबियों से बातचीत में इस बात पर एतराज जताया था कि ममता बनर्जी पुराने नेताओं को दरकिनार कर अपने भतीजे को मुख्यमंत्री पद के उत्तराधिकारी के तौर पर बढ़ावा दे रही हैं। लेकिन टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि शुभेंदु अगले विधानसभा चुनावों में अपने पचास से ज्यादा उम्मीदवारों को टिकट देने के लिए दबाव बना रहे थे और यह संभव नहीं था।

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बीजेपी ने डाले डोरे 

ममता और शुभेंद के बीच लगातार बढ़ती दूरियों के बीच बीजेपी लगातार उन पर डोरे डाल रही थी। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष और सांसद सौमित्र खान समेत कई नेता शुभेंदु को भगवा पार्टी में शामिल होने का न्यौता दे चुके थे। लेकिन शुभेंदु ने कहा था कि वे अब भी टीएमसी के सिपाही हैं। अब उनके बीजेपी में शामिल होने या अलग संगठन बनाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। लेकिन दोनों ही स्थितियों में नुक़सान तृणमूल कांग्रेस को ही होगा।

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पिता-भाई भी हैं सांसद

मेदिनीपुर इलाके में अधिकारी परिवार का काफी राजनीतिक रसूख है। शुभेंदु के पिता शिशिर अधिकारी वर्ष 1982 में कांथी दक्षिण विधानसभा सीट से कांग्रेस से विधायक बने थे। बाद में वे टीएमसी में शामिल हो गए थे। फिलहाल वे कांथी लोकसभा सीट से सांसद हैं। शुभेंदु के भाई दिब्येंदु भी जिले की तमलुक लोकसभा सीट से सांसद हैं।

इसी सप्ताह ममता ने बांकुड़ा में एक जनसभा में एलान किया था कि राज्य के सभी जिलों में वे खुद ही पार्टी की अकेली पर्यवेक्षक होंगी। इससे शुभेंदु की नाराजगी बढ़ गई थी। वरिष्ठ नेता होने के नाते वे कई जिलों में पार्टी के पर्यवेक्षक थे।

फिलहाल टीएमसी के नेतृत्व ने शुभेंदु के इस्तीफे पर कोई टिप्पणी नहीं की है। लेकिन पार्टी के एक वरिष्ठ नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, “शुभेंदु ने मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दिया है, विधानसभा या पार्टी से नहीं। हमें उम्मीद है कि यह मामला सुलझा लिया जाएगा।” लेकिन हाल के घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए ऐसी संभावना दूर की कौड़ी ही लगती है।

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प्रभाकर मणि तिवारी
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