मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने Bengal SIR में चुनाव ऑब्जर्वर SRO सुब्रत गुप्ता को सलाहकार बनाने के बाद अब बंगाल CEO मनोज कुमार अग्रवाल को बड़ी ज़िम्मेदारी दी है। इससे पहले IAS शांतनु बाला को मुख्यमंत्री का निजी सचिव बनाया गया।
मनोज कुमार अग्रवाल होंगे शुभेंदु सरकार के मुख्य सचिव
पश्चिम बंगाल के जिन सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल के निर्देशन में हुए विधानसभा चुनाव में जीतकर शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने, अब उन्हीं मनोज अग्रवाल को सरकार में बड़ा पद दिया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को बंगाल का नया मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया है। मुख्य सचिव राज्य सरकार का सबसे बड़ा अधिकारी होता है। वह सभी विभागों का समन्वय करता है और मुख्यमंत्री को सलाह देता है। यह पद IAS अधिकारियों में सबसे अहम माना जाता है। ये वही सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल हैं जिनके निर्देशन में हुए चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुँचाने के गंभीर आरोप ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी लगाती रही है।
SRO सुब्रत गुप्ता CM के सलाहकार
इससे पहले स्पेशल रोल ऑब्जर्वर यानी एसआरओ सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का सलाहकार बनाया गया। चुनाव आयोग ने 7 मई को ही सुब्रत गुप्ता को चुनाव ड्यूटी से मुक्त किया था। इसके ठीक दो दिन बाद नई सरकार ने उन्हें यह अहम जिम्मेदारी दे दी।
शनिवार को शपथ लेने के कुछ घंटों बाद ही पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस नियुक्ति की घोषणा कर दी। चुनाव आयोग ने बंगाल में विशेष मतदाता सूची संशोधन यानी SIR के लिए डॉ. सुब्रत गुप्ता को विशेष रोल ऑब्जर्वर यानी एसआरओ नियुक्त था। गुप्ता आईआईटी खड़गपुर से पीएचडी हैं।
IAS शांतनु बाला निजी सचिव
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शांतनु बाला को अपना निजी सचिव भी नियुक्त किया है। शांतनु बाला पहले दक्षिण 24 परगना जिले में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट रह चुके हैं। नबन्ना से जारी आदेश में कहा गया है कि यह नियुक्ति 'जन सेवा के हित में' की गई है और आगे के आदेश तक लागू रहेगी।क्यों उठ रहे हैं सवाल?
सुब्रत गुप्ता चुनाव आयोग के अधिकारी थे और चुनाव से पहले मतदाता सूची की जांच का काम देख रहे थे। अब उन्हें सीधे नए मुख्यमंत्री का सलाहकार बना दिया गया है। कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को इतनी जल्दी सरकार में बड़ी जिम्मेदारी देना सही है? हालाँकि, सरकार का कहना है कि उनका लंबा अनुभव अब नई सरकार को अच्छे प्रशासन में मदद करेगा।
शुभेंदु अधिकारी का बयान
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक दिन पहले गुप्ता की नियुक्ति पर कहा था, 'पिछली सरकार में ईमानदार और कुशल अधिकारियों को कोई काम नहीं दिया जाता था। उन्हें राज्य छोड़कर केंद्र में जाना पड़ता था। हम ऐसे कुशल अधिकारियों को मौका देना चाहते हैं ताकि वे लोगों की सेवा कर सकें। हम इन्हें वापस लाना चाहते हैं।'
टीओआई की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चुनाव ख़त्म होने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मनोज कुमार अग्रवाल से लंबी मुलाकात की थी। उसी बैठक में उन्हें अहम जिम्मेदारी देने का फैसला हुआ।पश्चिम बंगाल से और ख़बरें
SIR पर विपक्षी दलों की आपत्ति क्या?
मनोज कुमार अग्रवाल और सुब्रत गुप्ता पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव से जुड़े रहे हैं। और इस चुनाव के नतीजों पर एसआईआर का काफ़ी ज़्यादा असर होने का दावा किया जा रहा है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि एसआईआर के माध्यम से चुनाव आयोग और बीजेपी ने इस चुनाव को ग़लत तरीक़े से जीता है।
दरअसल, चुनाव आयोग ने चुनाव से पहले वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR किया। इसमें करीब 91 लाख नाम काट दिए गए, जो कुल वोटरों का लगभग 12% है। SIR शुरू होने से पहले राज्य में कुल 7.66 करोड़ वोटर थे। दिसंबर में ड्राफ्ट लिस्ट में क़रीब 60 लाख नाम हटाए गए। बाद में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के 60 लाख से ज्यादा मामलों को अदालती जांच के लिए भेजा गया। इनमें 27 लाख से ज्यादा को 'एक्सक्लूडेबल' माना गया। इस तरह कुल मिलाकर 91 लाख मतदाता हटा दिए गए।
विपक्ष कह रहा है कि SIR एक तरफा था और उनके वोटरों को निशाना बनाया गया। बीजेपी इसे चुनावी लिस्ट साफ करने का जरूरी कदम बता रही है। चाहे कोई इसे वोटरों की छंटनी कहे या चुनावी सफाई, SIR पश्चिम बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा और सबसे विवादित मुद्दा रहा।
SIR से किसे नुकसान हुआ?
चुनावी आंकड़े बताते हैं कि जिन 169 विधानसभा सीटों पर 25000 से ज्यादा नाम कटे, वहां 2021 में टीएमसी ने 128 सीटें जीती थीं और बीजेपी सिर्फ 41 सीटें जीत पाई। लेकिन 2026 में हालात उलट गए। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार अब बीजेपी की सीटें 104 हो गईं जबकि टीएमसी घटकर 63 रह गई। कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। जिन 124 सीटों पर नाम 25000 से कम कटे वहां भी बीजेपी ने 2021 में 36 जीती थीं, लेकिन अब 100 से ज़्यादा सीटें जीत लीं। यानी तीन गुना बढ़ोतरी गुई।जिन 38 सीटों पर 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी'के आधार पर सबसे ज्यादा नाम कटे, 2021 में TMC ने 34 सीटें जीती थीं। इस बार सिर्फ 22 रह गईं। दिलचस्प बात यह कि सबसे ज्यादा नाम कटने वाली 6 सीटों पर टीएमसी ने 4 सीटें बचाईं, लेकिन बीजेपी ने जोरासांको और हावड़ा नॉर्थ पर कब्जा कर लिया।
187 सीटों पर 5000 से ज्यादा नाम कटे, जिनमें बीजेपी ने 119 जीतीं। कई जगहों पर कटे नामों की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा थी।
ऐसी रिपोर्टों के बीच चुनाव से जुड़े अधिकारियों को शुभेंदु अधिकारी सरकार में बड़े पद मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। इस पर विवाद और बढ़ सकता है।