टीएमसी के बैंक खातों को तब फ्रीज किया गया जब ऋतब्रत बनर्जी के साथ जुड़े 10 विधायकों ने बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत में खातों में जमा पैसे के स्रोत पर सवाल उठाए और उनके ज़रिए किए गए लेन-देन की जांच की मांग की।
बड़ी बगावत का सामना कर रही तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों में रखे गए क़रीब 440 करोड़ रुपये की निकासी पर रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई पार्टी के बागी विधायकों की शिकायत पर हुई है, जिन्होंने इन पैसों के स्रोत की जाँच की मांग की थी। पहले से ही बगावत झेल रहीं ममता बनर्जी को अब इस कार्रवाई से एक और बड़ा झटका लगा है।
इस ताज़ घटना से पार्टी में पैसे के लेन देन पर नियंत्रण को लेकर चल रही आंतरिक लड़ाई और भी तेज हो गई है। ऋतब्रत बनर्जी का गुट अब पार्टी के लेन देन में गड़बड़ी का आरोप लगा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्राइवेट सेक्टर के एक बैंक में रखे गए इन तीन खातों पर 'डेबिट फ्रीज' लगा दिया गया है। इसका मतलब है कि इन खातों से पैसे निकाले या बाहर ट्रांसफर नहीं किए जा सकते हैं। हालााँकि, इन खातों में पैसे जमा किए जा सकते हैं।
बागियों ने दी पुलिस में शिकायत
यह कार्रवाई हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पार्टी में चल रही टूट-फूट के बीच हुई है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में क़रीब 60 विधायकों ने बगवात की है। अब पार्टी के संगठन और पैसे पर नियंत्रण की कोशिश चल रही है। ऋतब्रत बनर्जी गुट के 10 विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें एफआईआर दर्ज करने तथा पूरी जांच कराने की मांग की गई है।
बागी विधायकों की शिकायत
शिकायत में इन बागी विधायकों ने पूछा है कि इन खातों में जमा इतना बड़ा पैसा कहाँ से आया? उन्होंने जाँच एजेंसियों से यह पता लगाने को कहा है कि क्या यह पैसा वैध स्रोतों से आया या कट-मनी, सरकारी फंड का गलत इस्तेमाल, घोटालों आदि गैरकानूनी गतिविधियों से जमा किया गया। बागियों की शिकायत की कॉपी में कहा गया है कि विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि गैरकानूनी गतिविधियों से पैसा जमा किया गया हो सकता है, जिसमें प्रभाव का दुरुपयोग, बेईमानी से वित्तीय लेन-देन और अवैध वसूली शामिल है।
अरूप विश्वास ने पहले बैंक को चिट्ठी लिखी थी
बाग़ी विधायकों की शिकायत से कुछ दिन पहले ही वरिष्ठ टीएमसी नेता अरूप विश्वास ने बैंक को चिट्ठी लिखकर खातों की सुरक्षा और ट्रांजेक्शन रोकने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी के 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा के जमा को तब तक किसी को ऑपरेट नहीं करने देना चाहिए, जब तक पार्टी में नेतृत्व विवाद सुलझ न जाए।
बिस्वास ने खातों के मैनेजमेंट और कंट्रोल को लेकर चिंता जताते हुए उन्हें फ्रीज़ करने की मांग की थी, वहीं बागी विधायकों ने अब फंड के सोर्स की आपराधिक जांच की मांग की है। खास बात यह है कि ये शिकायतें उसी साइबर क्राइम थाने में की गई हैं, जहां पहले अरूप विश्वास के ख़िलाफ़ लियोनेल मेसी के कोलकाता दौरे वाले विवाद में केस चल रहा है।
ममता गुट का पलटवार
ममता बनर्जी के वफादार विधायक कुणाल घोष ने कहा कि अरूप विश्वास अब पार्टी के कोषाध्यक्ष नहीं हैं और उन्हें पार्टी की आर्थिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। घोष ने कहा, 'साफ़ कर दें कि अरूप विश्वास पहले कोषाध्यक्ष थे। लेकिन 5 जून को हुई कार्यकारी समिति की बैठक में सर्वसम्मति से सुभाषिश चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष बनाया गया। अब वे ही यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।' ममता बनर्जी के समर्थक एक वरिष्ठ विधायक ने पीटीआई से कहा कि उन्हें पुलिस की कार्रवाई की जानकारी मिली है, लेकिन आधिकारिक सूचना का इंतजार है। उन्होंने कहा, 'हमने सुना है कि तीन खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। शाम तक सारी डिटेल्स पता चल जाएगी।'
अब तीन खातों के डेबिट फ्रीज होने के बाद टीएमसी की अंदरूनी लड़ाई सिर्फ नियंत्रण की बहस से आगे निकलकर पुलिस शिकायत, पैसे के स्रोत पर सवाल और यह विवाद कि पार्टी की तरफ से कौन बोल सकता है, इस स्तर तक पहुंच गई है। यह घटनाक्रम पार्टी के लिए मुश्किल समय पैदा कर रहा है, क्योंकि चुनाव में हार के बाद पहले ही संगठन को संभालने की चुनौती है और अब पैसे के मामले में पुलिस की जांच भी शुरू हो गई है।