कोलकाता में सोमवार को चुनाव तैयारियों पर आयोजित बैठक में चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और टीएमसी प्रतिनिधिमंडल के बीच यह विवाद हुआ। टीएमसी ने आरोप लगाया कि सीईसी ने उन पर चिल्लाया और महिला नेताओं का अनादर किया। मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि टीएमसी की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पहले चिल्लाना शुरू किया। दोनों तरफ़ से आरोप-प्रत्यारोप लगे। इससे पहले जब सीईसी ज्ञानेश कुमार सोमवार सुबह कालीघाट मंदिर पहुँचे थे तो भारती विरोध का सामना करना पड़ा। उनको काले झंडे दिखाए गए और ज्ञानेश कुमार वापस जाओ के नारे झेलने पड़े। 
हालाँकि, विवाद मतदाताओं के नाम कटने पर हुआ, लेकिन यह बैठक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर हुई थी। चुनाव आयोग की फुल बेंच यानी सीईसी ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कोलकाता के न्यू टाउन के एक होटल में टीएमसी, बीजेपी, सीपीआई(एम), कांग्रेस, आप और अन्य पार्टियों से मुलाकात की।
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टीएमसी मंत्री के गंभीर आरोप

बैठक में टीएमसी की ओर से राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, फिरहाद हकीम और अन्य नेता शामिल हुए। बैठक के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मीडिया से कहा, 'सीईसी ने मुझ पर चिल्लाया और उंगली दिखाई। उन्होंने कहा कि मैं चिल्ला रही हूं। एक महिला मंत्री से ऐसा व्यवहार कैसे कर सकते हैं? इससे लगता है कि वे महिलाओं का सम्मान नहीं करते। इसी वजह से महिला मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हटाए गए हैं और मेल-फीमेल रेशियो बदल गया है।'

वोटर के नाम हटाने, एडजुडिकेशन के मुद्दे उठे

भट्टाचार्य ने कहा कि टीएमसी ने मतदाता सूची से 63 लाख नामों के हटाए जाने और 60 लाख मामलों की जांच यानी एडजुडिकेशन का मुद्दा उठाया। ये मामले ज्यूडिशियल ऑफिसर देख रहे हैं। चंद्रिमा ने आरोप लगाया कि सीईसी ने कहा, 'सब कुछ सुप्रीम कोर्ट में है, आप कोर्ट गए हैं तो अब चर्चा मत करो।' उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में एसआईआर पूरा हो गया, लेकिन बंगाल में सुप्रीम कोर्ट मॉनिटर कर रहा है।

टीएमसी नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि हमने सही किया कि सुप्रीम कोर्ट गए, क्योंकि आम लोगों के हक प्रभावित हो रहे हैं। असली मतदाताओं के नाम लिस्ट से बाहर नहीं होने चाहिए।

दूसरी तरफ़, ईटी के अनुसार चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि टीएमसी ने 60 लाख एडजुडिकेशन केस का मुद्दा उठाया, लेकिन सीईसी ने मना कर दिया क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। ईटी ने ईसीआई के सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सीईसी पर चिल्लाना शुरू किया तो सीईसी ने कहा कि आवाज़ नीची रखें और शिकायत लिखित में दें।

एक या दो चरण में हों चुनाव: दलों की मांग

बैठक में कई पार्टियों ने मांग की कि चुनाव एक या दो चरणों में हों। टीएमसी, बीजेपी और सीपीआई(एम) ने कम चरणों में चुनाव की मांग की। पार्टियों ने कहा कि चुनाव शांतिपूर्ण हों, असामाजिक तत्वों पर सख्ती हो, सीएपीएफ़ की ज़्यादा तैनाती हो, क्रूड बम, अवैध हथियार और मनी-मसल पावर रोकने के कड़े क़दम उठाए जाएं।
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सीईसी ज्ञानेश कुमार ने सभी पार्टियों को भरोसा दिया कि चुनाव क़ानून के अनुसार होंगे। उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग हिंसा पर जीरो टॉलरेंस रखता है। हम निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करेंगे।' उन्होंने एसआईआर को पारदर्शी बताया और कहा कि फॉर्म 6, 7, 8 से अब भी नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने का मौक़ा है।
यह विवाद तब हो रहा है जब पश्चिम बंगाल में एसआईआर से 63.66 लाख नाम यानी क़रीब 8.3% हटाए गए। कुल मतदाता 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गए। 60.06 लाख नाम 'अंडर एडजुडिकेशन' में हैं, जिनकी जाँच चल रही है।

नाम कटने का मुद्दा संसद में भी उठा

टीएमसी सांसदों ने संसद में भी 'वोटर डिसइनफ्रेंचाइजमेंट' पर बहस का नोटिस दिया है। लोकसभा में सौगत रॉय ने एडजर्नमेंट मोशन दिया, राज्यसभा में नदीमुल हक और साकेत गोखले ने रूल 267 के तहत नोटिस दिया।
इधर, नाम काटे जाने को लेकर ही ममता बनर्जी शुक्रवार से कोलकाता में धरने पर हैं। टीएमसी का आरोप है कि एसआईआर से असली मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है। चुनाव अप्रैल में होने हैं और यह विवाद तेज हो गया है। 
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ममता: मेरे धरना स्थल पर बीजेपी पर्चे बाँट रही, उन्हें पकड़ो

ममता बनर्जी ने सोमवार को कोलकाता में अपने धरने की जगह पर बीजेपी और उसकी एजेंसियों पर आरोप लगाया कि वे वहाँ पर्चे बाँट रहे हैं। ये पर्चे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 14 मार्च को कोलकाता में होने वाली रैली के बारे में थे। ममता तीन दिनों से शहर के दिल में धर्मतला पर धरना दे रही हैं। ये धरना एसआईआर के खिलाफ है, जिसमें कई लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं।

उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि ऐसे लोगों को पकड़ लें और पुलिस को सौंप दें। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य मंत्री शशि पांजा को इसकी पुलिस में शिकायत दर्ज करने को कहा। ममता ने अपने समर्थकों से कहा, 'उन्हें दूसरे राजनीतिक दल के कार्यक्रम में ऐसे पर्चे बाँटने का कोई हक नहीं है। उन्हें पकड़ो और पुलिस के पास ले जाओ।' उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनावी प्रक्रिया को गड़बड़ करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, 'उन्हें लोगों का समर्थन नहीं है। वे वोट चोर हैं। वे एजेंसियों का इस्तेमाल करते हैं।' ममता ने ये भी दावा किया कि पर्चे बाँटने वाले लोग जब उनसे टकराए तो भाग गए।