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अब बंगाल में टीएमसी ने दिया नारा, 'गोली मारो सालों को'

जिस पश्चिम बंगाल की छवि 'भद्रलोक बंगाली' की रही है, जहाँ राजनीतिक विरोध सैद्धांतिक मतभेद और बौद्धिक विमर्श तक सीमित रहा है, उस राज्य में राजनीतिक सरगर्मी इस रूप से बढ़ गई है कि विरोधियों को खुले आम गाली गलौच और हिंसा की धमकी दी जाने लगी है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की दक्षिण कोलकाता के एक जुलूस में इसकी एक झलक देखने को मिली है। 

राजधानी कोलकाता के दक्षिणी इलाक़े टॉलीगंज से राश बिहारी अवेन्यू तक के शांति जुलूस में भीड़ चिल्ला रही थी, 'देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को।' अव्वल तो यह शांति जुलूस था, दूसरे इस जुलूस में इस तरह की गाली गलौच और हिंसक नारेबाजी की किसी ने कल्पना नहीं की होगी। कुछ सेकंड का एक वीडियो जो सोशल मीडिया पर चल रहा है, उसमें यह साफ नहीं है कि इस तरह के भड़काऊ नारे की वजह क्या थी। 

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'यह हमारी संस्कृति नहीं'

पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रवक्ता शमीक भट्टाचार्य ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्ति करते हुए तंज किया, "यही तृणमूल की संस्कृति है।" 

वाम मोर्च के सुजन चक्रवर्ती ने कहा, "तृणमूल के शरीर में तो बीजेपी का ही ख़ून बहता है न।" 

दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने भी इस ग़लत क़रार दिया है। पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, "अति उत्साही लोगों का  के आचरण का स्वागत नहीं किया जा सकता है।"

कार्यकर्ताओं के इस नारेबाजी से ख़ुद टीएमसी फंस गई है। दक्षिण कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष देवाशीष कुमार ने कहा,

"हम निश्चित रूप से इस नारे का समर्थन नहीं करते, यह हमारी संस्कृति नहीं है।"


देवाशीष कुमार, अध्यक्ष, दक्षिण कोलकाता तृणमूल कांग्रेस

मंत्रियों की मौजूदगी में लगे नारे

टीएमसी के लिए मुसीबत की बात यह है कि इस जुलूस में राज्य सरकार के दो मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय व अरूप विश्वास के अलावा दक्षिण कोलकाता की सांसद माला राय भी थीं। यह नारेबाजी उनकी मौजूदगी में हुई। उन्होंने इसे रोकने की कोशिश नहीं की या नहीं रोक पाए, इससे पार्टी को ज्यादा परेशानी है। 

लेकिन बीजेपी यह कह नहीं बच सकती कि उसके कुछ अति उत्साही कार्यकर्ता ही इस तरह के काम करते हैं।

'बंगाल मांगोगे, चीर देंगे'

कोलकाता से सटे हावड़ा के आन्दुल में हुए एक सभा में टीएमसी के नेता मदन मित्र ने भी भड़काऊ बातें कही हैं। उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंच से कहा,

"पहले पाकिस्तान से कहा जाता था, दूध मांगोगे खीर देंगे, कश्मीर मांगोगे चीर देंगे। लेकिन बीजेपी से कहा जा रहा है, दूध मांगोगे खीर देंगे, बंगाल मांगोगे चीर देंगे।"


मदन मित्र, नेता, टीएमसी

मदन मित्र के ऐसा कहने के बाद वहाँ मौजूद लोगो ने तालियाँ बजाईं। 

बीजेपी ने ही की थी शुरुआत

इस मामले में शुरुआत तो बीजेपी ने ही की थी। बीजेपी सांसद व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर की सभा में नारे लगाए गए, ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को।’ हालांकि इसमें यह नहीं कहा गया है कि देश के गद्दार कौन लोग हैं, पर यह बिल्कुल साफ़ है क्योंकि बीजेपी समुदाय विशेष के लोगों को ‘गद्दार’ बताती रही है।  

दिल्ली के रिठाला विधानसभा क्षेत्र में एक चुनाव रैली में भाषण देने के बाद अनुराग ठाकुर मंच से नारा लगाया, ‘देश के गद्दारों को’ और उनके सामने खड़े बीजेपी कार्यकर्ता इसका जवाब दिया, ‘गोली मारो सालों को।’ ठाकुर ने ऐसा बार-बार किया और हर बार उनके कार्यकर्ताओं ने वही जवाब दिया। 

चुनाव आयोग ने ठाकुर को कारण बताओ नोटिस दिया था। इसमें जाति, भाषा, धर्म, समुदाय के नाम पर अलग-अलग वर्ग के लोगों के बीच वैमनष्य और नफ़रत फैलाने के प्रयास करने पर जवाब माँगा गया था। हालाँकि, ठाकुर ने जवाब में कहा था कि नारे के विवादास्पद हिस्से को उन्होंने नहीं लगाया था। हालाँकि वीडियो में वह बार-बार नारे लगवाते हैं और भीड़ की प्रतिक्रिया पर ताली भी बजाते दिखते हैं। 

उन्हें स्टार प्रचारकों की सूची से हटा दिया गया था। 

लेकिन उसके बाद पार्टी में उनका महत्व बढ़ता हुआ दिखा। इसके ठीक बाद संसद की बैठक में उन्होंने ही पार्टी की बात सबसे पहले रखी थी। 

क्या बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने लोगों को भड़काया नहीं था? 
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