पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बड़ा फ़ैसला लिया है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह आगामी चुनाव में अकेले लड़ेगी और राज्य की सभी 294 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। यह फैसला गुरुवार को दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं की अहम बैठक के बाद लिया गया।

बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के 10, राजाजी मार्ग वाले घर पर हुई। इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, राज्य प्रभारी गुलाम अहमद मीर, पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सुभंकर सरकार, वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी और सांसद इशा खान चौधरी जैसे कई नेता शामिल हुए। कुछ नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी जुड़े।
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बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए राज्य के प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने कहा, 'हमने पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर रणनीति पर गहन चर्चा की। चुनाव अप्रैल-मई में होने की संभावना है। सभी से बात करने के बाद फ़ैसला हुआ है कि कांग्रेस पश्चिम बंगाल में सभी 294 सीटों पर अकेले लड़ेगी। हम इसी तैयारी के साथ आगे बढ़ेंगे।'

मीर ने कहा कि पहले गठबंधन करने से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा था। उन्होंने कहा, 'पिछले गठबंधनों ने ग्रासरूट स्तर पर हमारे कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित किया। इस बार हम अकेले लड़ेंगे ताकि पार्टी मजबूत हो और कार्यकर्ता उत्साहित रहें।'

पिछले चुनाव में वाम मोर्चा से था गठबंधन

पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने वाम मोर्चा के साथ गठबंधन किया था, लेकिन पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। इस बार कांग्रेस ने किसी भी पार्टी से गठबंधन न करने का साफ फैसला लिया है। यह फैसला पार्टी को मजबूत करने और अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश माना जा रहा है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं। चुनाव मार्च-अप्रैल 2026 में होने की उम्मीद है, हालाँकि चुनाव आयोग ने अभी आधिकारिक तारीखें घोषित नहीं की हैं। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को ख़त्म हो रहा है।

यह फ़ैसला राज्य में तृणमूल कांग्रेस की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बीजेपी के सामने कांग्रेस की नई चुनौती है। कांग्रेस का कहना है कि अकेले लड़ने से पार्टी के कार्यकर्ता ज्यादा मेहनत करेंगे और पार्टी को फायदा होगा।

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि बैठक में सभी नेताओं ने अपनी राय रखी। राज्य नेतृत्व ने अकेले लड़ने की मांग की थी, जिसे हाईकमान ने समर्थन दिया। अब पार्टी पूरे राज्य में अपनी तैयारी तेज करेगी।
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बंगाल में कांग्रेस की स्थिति कैसी?

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी की वर्तमान राजनीतिक स्थिति काफी कमजोर है। पार्टी राज्य में अपनी पुरानी ताकत खो चुकी है और अब बहुत सीमित प्रभाव रखती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 0 सीट मिली। पार्टी का वोट शेयर सिर्फ करीब 3% रहा। इससे पहले 2016 में पार्टी को 44 सीटें मिली थीं, लेकिन 2021 में पूरी तरह सफाया हो गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की सिर्फ 1 सीट जीती। पार्टी का कुल प्रभाव बहुत कम है।

राज्य में मुख्य लड़ाई तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच है। टीएमसी सत्ता में है, और बीजेपी मुख्य विपक्ष। कांग्रेस तीसरे या चौथे नंबर पर सिमट गई है।
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पार्टी के लिए मुश्किलें क्या?

पूर्व राज्य अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने 2024 में इस्तीफा दे दिया। अब नया अध्यक्ष सुवंकर सरकार हैं। पार्टी के पास मजबूत संगठन और वोट बैंक नहीं बचा। मुस्लिम बहुल इलाकों में पहले अच्छा प्रभाव था, लेकिन अब टीएमसी ने वहां भी पकड़ मजबूत कर ली। कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं, और पार्टी को अपनी जमीन दोबारा बनाने में समय लगेगा।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में कांग्रेस अभी मार्जिनल पार्टी है। 2026 चुनाव में अकेले लड़कर पार्टी अपनी पहचान बचाने और भविष्य में मजबूत होने की कोशिश कर रही है, लेकिन टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर में कांग्रेस का प्रदर्शन चुनौतीपूर्ण लग रहा है।