पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार की बुलडोज़र कार्रवाई तेज़ हो गई है। गरिया में टीएमसी पार्टी दफ्तर और प्रतिष्ठित क्लॉक टावर को ध्वस्त कर दिया गया है। तिलजला इलाके में कथित अवैध इमारतों को भी गिराने का काम जारी है। कोलकाता के कई इलाकों में अफरातफरी बनी हुई है।
कोलकाता में क्लॉक टॉवर गिराता हुआ बुलडोज़र
पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई तेज हो गई है। गुरुवार (14 मई 2026) को तृणमूल कांग्रेस का एक पार्टी कार्यालय और क्लॉक टॉवर गिरा दिया गया, जबकि तिलजला इलाके में बिल्डिंगों पर बुलडोज़र एक्शन जारी है। इलाके के लोग दहशत में हैं। कोलकाता के कुछ इलाकों में अफरातफरी का माहौल है। राज्य में बीजेपी सरकार अस्तित्व में आए अभी तीन-चार दिन ही हुए हैं।
तृणमूल पार्टी दफ्तर और क्लॉक टॉवर ध्वस्त
कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) की टीम ने दक्षिण कोलकाता के गरिया इलाके में एक हरे रंग के क्लॉक टॉवर को गिरा दिया। स्थानीय लोगों की शिकायत के बावजूद पहले कार्रवाई नहीं हुई थी, लेकिन 2025 में अदालत के आदेश के बाद भी देरी हुई। क्लॉक टॉवर का उद्घाटन पूर्व तृणमूल विधायक और पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास ने किया गया था। अरूप बिस्वास हालिया विधानसभा चुनाव में टीएमसी की टॉलीगंज सीट भाजपा उम्मीदवार पापिया अधिकारी से हार गए हैं।
बीजेपी नेताओं का आरोप है कि "उन्होंने हमारे खेल के मैदान के अंदर यह क्लॉक टावर बनाया। जब हमने विरोध किया तो अरूप बिस्वास के लोग क्लब सदस्यों को धमकी देते थे।" पिछले कुछ वर्षों में तृणमूल शासन के दौरान कोलकाता के कई इलाकों में ऐसे क्लॉक टावर बने थे, जिनमें से कुछ लंदन के बिग बेन की नकल लगते थे।
इस बीच उत्तर 24 परगना के नैहाटी इलाके में रेलवे की जमीन पर बने तृणमूल कांग्रेस पार्टी कार्यालय को अवैध बताकर भी ध्वस्त कर दिया गया।
तिलजला में दहशत
मंगलवार (12 मई) को तिलजला के जीजे खान रोड पर एक कथित अवैध टैनरी/कारखाने में लगी आग में दो मजदूरों की मौत हो गई थी और तीन घायल हुए थे। इसके बाद बुधवार से वहां ध्वस्तीकरण शुरू हुआ, जो अभी भी जारी है। इलाके में दहशत है। एक पांच मंजिला इमारत (जहां आग लगी थी) और उसके बगल की तीन मंजिला इमारत को खाली करा लिया गया। आठ-नौ परिवारों को अचानक निकाल दिया गया। निवासियों का आरोप है कि कोई औपचारिक नोटिस नहीं दिया गया और वे अपना सामान भी नहीं ले पाए। इलाके में भारी पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात हैं, प्रवेश बिंदुओं को सील कर दिया गया है।
ध्वस्तीकरण स्थल पर एक भारी पीला अर्थमूवर (बुलडोजर) घंटों खड़ा रहा, हालांकि संकरी गली में इसका इस्तेमाल सीमित था। अधिकारियों ने बताया कि पांच मंजिला इमारत को ऊपर से नीचे की ओर तोड़ा जा रहा है और पूरा काम एक सप्ताह से ज्यादा समय ले सकता है। निवासियों ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की है, जिसकी सुनवाई शुक्रवार को हो सकती है।
स्थानीय लोग बुलडोजर को "डर का प्रतीक" बता रहे हैं। एक 40 वर्षीय महिला ने कहा, "आवाज रुक ही नहीं रही। कल पता नहीं किसका घर टूटे।" एक फार्मासिस्ट ने कहा, "यह नई बंगाल का प्रतीक है।" इलाके में मुस्लिम आबादी काफी है, जिसे लेकर कुछ लोग चिंतित हैं।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने "अवैध भवनों और अवैध कारखानों में भ्रष्टाचार" पर जीरो टॉलरेंस नीति की घोषणा की। उन्होंने कासबा, तिलजला, मोमिनपुर और एकबालपुर जैसे इलाकों में बिजली सप्लाई काटने और ऑडिट के निर्देश दिए। CESC ने KMC के साथ तालमेल कर अवैध कनेक्शनों की जांच शुरू कर दी है।
भाजपा की जीत के दौरान ही न्यू मार्केट क्षेत्र में भी तृणमूल पार्टी कार्यालय समेत अन्य भवन गिराए गए थे। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के "बुलडोजर मॉडल" की याद दिलाती है, जहां अवैध निर्माणों पर सख्ती की जाती रही है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में नोटिस और उचित प्रक्रिया पर जोर दिया है।
स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और तिलजला के कई निवासियों का भविष्य अनिश्चित है। सरकार अवैध निर्माणों पर सख्ती बरत रही है, जबकि प्रभावित परिवार न्याय की गुहार लगा रहे हैं।