पश्चिम बंगाल में पहले चरण (2026) में 93% के भारी मतदान दर के दावों के बावजूद, आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2021 की तुलना में यह सिर्फ 2-3% अधिक है। वरिष्ठ पत्रकार नीरेंद्र नागर "भारी मतदान" के दावों को भ्रामक क्यों बता रहे हैं, जानिए:
ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारीः कौन बनेगा मुख्यमंत्री
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुए मतदान के बारे में कहा जा रहा है कि इस बार 93% का बंपर मतदान हुआ है। चुनाव आयोग की 23 अप्रैल को रात 8 बजे जारी प्रेस रिलीज़ के अनुसार यह आंकड़ा 91.78% है। पत्रकार एवं विश्लेषक इस ‘बंपर’ मतदान का कारण तलाश कर रहे हैं और यह अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जीत टीएमसी को मिलेगी या बीजेपी को।
आज की यह चर्चा इसके उलट विषय पर है। हम इसमें यह पता करेंगे कि क्या वाक़ई इस बार बंपर मतदान हुआ है जो पिछली बार के मतदान (83%) के मुक़ाबले 10% अधिक है।
आँकड़ों और तर्क के आधार पर की जा रही इस चर्चा में सारे आँकड़े चुनाव आयोग से लिए गए हैं और उनको राउंड फ़िगर में बदल दिया गया है ताकि आँक़ड़े उलझन न पैदा करें। हम यहाँ कोई निश्चित आँकड़ा तय नहीं करने जा रहे। बस यही पता करेंगे कि मतदान में जो वृद्धि हुई है वह ‘सामान्य’ है या ‘असामान्य’।
पहले कुछ आँकड़े यहाँ दर्ज कर लिए जाएँ ताकि जब कैलकुलेशन किया जाए तो यह पता रहे कि ये संख्याएँ कहाँ से आ रही हैं।
2021 के आँकड़े- 1. कुल वैध वोटर - 7,34,14,746 -7.34 करोड़।
- 2. कुल वोट पड़े - 6,04,19,691 - 6.04 करोड़
- 3. कुल चुनाव क्षेत्र -294
2026 के आँकड़े
- 4. कुल वैध वोटर - 6,82,51,008 यानी 6.83 करोड़
- 5. डिलीट किए गए - 63,66,952 यानी 64 लाख
- 6. तार्किक असंगति के तौर पर चिह्नित 60,06,675 यानी 60 लाख में से 33 लाख लिस्ट में रखे गए हैं लेकिन 27 लाख हटा दिए गए।
- 7. कुल हटाए गए वोटर - 91 लाख जिसनें से 27 लाख वोटरों को मामला ट्रिबयूनलों को तय करना है।
- 8. पहले चरण के कुल वैध वोटर - 3,60,77,171 - 3.60 करोड़
- 9. पहले चरण की कुल सीटें - 152
- 10. मतदान हुआ - 92-93%
अब आते हैं कैलकुलेशन पर।
जो 64 लाख नाम चुनाव आयोग ने पहली बार में हटाए थे (देखें क्रमांक 5), वह यह कहकर हटाए थे कि वे या तो मर चुके हैं, या शिफ्ट कर चुके हैं या ड्युप्लिकेट वोटर हैं। यानी ये वे वोटर हैं जो पिछली लिस्ट (देखें क्रमांक 1) में थे मगर उन्होंने वोट नहीं दिया होगा क्योंकि वे तो वोट देने के लिए मौजूद थे ही नहीं। चुनाव आयोग के अनुसार या तो मर चुके थे या कहीं और जा चुके थे या ड्युप्लिकेट वोटर थे।
यानी वे चावल में कंकड़ की तरह थे जिनको खाया नहीं जा सकता।
अब मान लें कि इसी तरह का SIR 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भी हुआ होता। तब कुल 7.34 करोड़ वोटरों में से ये 64 लाख कंकड़ वोटर हट चुके होते और बचते 6.70 करोड़ वोटर।
(7.34-0.64=6.70 करोड़)
अब इस डेटा के आधार पर 2021 का मतदान प्रतिशत निकालें।
7.34 करोड़ (बिना डिलीशन) में से 6.04 करोड़ ने वोट दिया (देखें क्रमांक 2) ।
प्रतिशत बना - 82.28
6.70 करोड़ (डिलीशन के बाद) में से 6.04 करोड़ ने वोट दिया।
प्रतिशत बना - 90.14
यानी अगर 2021 में भी SIR के कारण हटाए गए मृत, शिफ्ट कर गए और दोहरे वोटरों के नाम नहीं रहते तो वोटिंग परसेंटेज 90% आता।
इस बार पहले चरण में कितने प्रतिशत वोट पड़े हैं - 92-93%।
तो वृद्धि कितनी हुई - 2-3%।
ध्यान दें, ऊपर जो डेटा 2021 के मतदान का हमने लिया है, वह 294 सीटों का है (देखें क्रमांक 3) जबकि 93% का जो इस बार का डेटा है, वह केवल 152 सीटों का है (देखें क्रमांक 9)। अगर शेष 142 में यही मतदान प्रतिशत रहता है तो वोटिंग में कुल बढ़त यही रहेगी 2-3%। परंतु यदि यह मत-प्रतिशत बढ़ता या घटता है तो यह बढ़त भी घट-बढ़ सकती है।
लेकिन यह किसी भी हालत में ज़बरदस्त नहीं होगी। 2-3% की बढ़ोतरी ज़बरदस्त नहीं कही जा सकती।