राज्यसभा में BJP के पास 114 सांसद हैं। 245 सदस्यों वाले ऊपरी सदन में सामान्य बहुमत के लिए 123 सांसदों और दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 की ज़रूरत है। फ़िलहाल एनडीए के पास मनोनीत और निर्दलीय मिलाकर क़रीब 151 सांसद हैं। बंगाल में जीत के बाद यह संख्या बढ़ जाएगी।
महिला आरक्षण संशोधन बिल पर संसद में बहस। (फाइल फोटो)
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के जिन तीन राज्यसभा सांसद इस्तीफा देकर बीजेपी की तरफ़ चले गए उन सीटों के लिए चुनाव आयोग ने सोमवार को उपचुनाव की तारीख़ घोषित कर दी है। इन सीटों पर 24 जुलाई को मतदान होगा और उसी दिन मतगणना भी की जाएगी। इन उपचुनावों के नतीजों से केंद्र की सत्तारूढ़ बीजेपी और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए को राज्यसभा में बड़ी बढ़त मिलने की संभावना है। इन सीटों पर पहले टीएमसी के सांसद थे, लेकिन पार्टी में अंदरूनी संकट के बीच तीनों सांसदों के इस्तीफे के कारण सीटें खाली हुई थीं।
राज्यसभा की ये तीन सीटें सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं। इन तीनों नेताओं ने जून महीने में तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार और पार्टी में बढ़ते आंतरिक विवाद के बीच हुआ। सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक का कार्यकाल 18 अगस्त 2029 तक था। सुष्मिता देव का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक चलना था। इन इस्तीफों के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की संख्या घटकर 10 सांसद रह गई है।
बीजेपी की जीत लगभग तय
पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीजेपी के पास 207 विधायक हैं। सदन की कुल प्रभावी सदस्य संख्या 293 है और एक सीट खाली है। ऐसे में विधानसभा के मौजूदा गणित के आधार पर बीजेपी तीनों राज्यसभा सीटें आसानी से जीत सकती है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंटी हुई है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के पास लगभग 65 विधायक बताए जा रहे हैं। ममता बनर्जी के साथ करीब 15 विधायक हैं। ऐसी स्थिति में दोनों गुट उम्मीदवार उतारते भी हैं तो उनकी जीत की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।
राज्यसभा में मजबूत होगी NDA की स्थिति
इन तीन सीटों पर जीत के बाद एनडीए की राज्यसभा में कुल संख्या बढ़कर 154 तक पहुंच सकती है। फिलहाल राज्यसभा में बीजेपी के 114 सांसद हैं। सदन में सामान्य बहुमत के लिए 123 सांसदों की ज़रूरत होती है। एनडीए के कुल 151 सदस्य हैं, जिनमें मनोनीत और निर्दलीय सदस्य भी शामिल हैं। तीन नई सीटें मिलने के बाद एनडीए दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े 163 से केवल 9 सीटें दूर रह जाएगा।
एनडीए को दो-तिहाई बहुमत मिलने से केंद्र सरकार को भविष्य में अहम विधेयकों और संभावित संवैधानिक संशोधनों के दौरान रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
विपक्ष की स्थिति
राज्यसभा में विपक्षी INDIA गठबंधन की संख्या घटकर 64 सांसदों तक पहुंच गई है। इसके अलावा 27 सांसद ऐसे हैं जो किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। इनमें प्रमुख रूप से डीएमके के 8 सांसद, बीजेडी के 5 सांसद, आम आदमी पार्टी के 3 सांसद बताए जाते हैं। इनमें से अधिकांश सदस्य विभिन्न मुद्दों पर बीजेपी का विरोध करते रहे हैं।
बीजेपी दो-तिहाई बहुमत क्यों चाहिए?
बीजेपी मुख्य रूप से संवैधानिक संशोधन बिल पास कराने के लिए राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत यानी 163 सीटें हासिल करने की कोशिश कर रही है। पहले से पास हुआ 33% आरक्षण 2029 या उससे पहले लागू करने के लिए समयसीमा बदलने वाला बिल बीजेपी की प्राथमिकता में है। इसके अलावा लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर क़रीब 850 करने और नए जनगणना के आधार पर सीटों का परिसीमन करने के लिए बीजेपी कोशिशों में जुटा है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय, राज्य मंत्री अगर 30 दिनों से ज्यादा जेल में रहें तो स्वतः पद से हट जाएंगे, इसको लेकर भी सरकार बिल लाने वाली है। इन विधेयकों को पारित कराने के लिए उसे दो-तिहाई बहुमत चाहिए।
क्यों ज़रूरी है दो-तिहाई बहुमत?
संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संवैधानिक संशोधन के लिए दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में कुल सदस्यों का बहुमत के अलावा उपस्थित और मतदान करने वालों का 2/3 बहुमत चाहिए। साधारण बिल के लिए साधारण बहुमत काफी है, लेकिन ये बिल संवैधानिक हैं। इस वजह से दो-तिहाई बहुमत के बिना इनको पास नहीं माना जा सकता है।
अलग-अलग चुनाव क्यों होते हैं?
चुनाव आयोग के अनुसार, तीन सीटों के चुनाव के लिए अलग-अलग नोटिफ़िकेशन मंगलवार को जारी किए जाएंगे। नॉमिनेशन भरने की आखिरी तारीख 14 जुलाई होगी, जिसके अगले दिन स्क्रूटनी होगी और 17 जुलाई को नाम वापस लिए जा सकेंगे। चुनाव आयोग ने साफ़ किया है कि राज्यसभा की प्रत्येक रिक्त सीट को अलग रिक्ति माना जाता है। इसलिए हर सीट के लिए अलग चुनाव कराया जाता है, भले ही मतदान और मतगणना एक ही दिन हो। आयोग के अनुसार यह प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 147 से 151 के प्रावधानों के अनुरूप है। 2009 में दिल्ली हाई कोर्ट भी इस व्यवस्था को वैध ठहरा चुका है।
बहरहाल, पश्चिम बंगाल में हुए सत्ता बदलाव के बाद ये उपचुनाव केवल तीन राज्यसभा सीटों तक सीमित नहीं माने जा रहे हैं। इनका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। यदि बीजेपी तीनों सीटें जीतती है तो राज्यसभा में उसकी ताक़त और बढ़ेगी, जबकि तृणमूल कांग्रेस की मौजूदगी और कमजोर होगी। ऐसे में इन उपचुनावों पर पूरे देश की राजनीतिक नज़रें टिकी हुई हैं।