चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी की, लेकिन हटाए गए नामों पर अभी स्पष्टता क्यों नहीं? क्या है पूरा विवाद और चुनाव आयोग ने इस पर क्या कहा?
ज्ञानेश कुमार, ममता बनर्जी।
चुनाव आयोग ने सोमवार को आधी रात पश्चिम बंगाल के लिए पहली सप्लीमेंट्री मतदाता सूची जारी कर दी। यह सूची स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के बाद न्यायिक अधिकारियों द्वारा फ़ैसला किए गए मामलों पर आधारित है। लेकिन बड़ी बात यह है कि आयोग ने अभी तक यह नहीं बताया कि कितने नाम हटाए गए और कितने नए नाम जोड़े गए। इससे मतदाताओं में काफी अनिश्चितता बनी हुई है।
इसके अलावा सर्वर गड़बड़ी के कारण लोग अपना नाम चेक नहीं कर पा रहे हैं। डाउनलोड करने में बार-बार एरर आ रहा है। बंगाल में एसआईआर में गड़बड़ियों का आरोप लगाती रहीं ममता ने अब केरल में चुनाव आयोग के ख़त पर बीजेपी की मुहर लगे होने के मामले पर कहा कि बीजेपी का रबर स्टैंप ईसी के पत्र पर लगना साबित करता है कि आयोग किसके इशारे पर चल रहा है।
चुनाव आयोग के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों ने अब तक 60 लाख से ज़्यादा लंबित मामलों में से क़रीब 29 लाख मामलों का फ़ैसला कर लिया है। बाक़ी मामलों पर काम जारी है।
हटाए गए नामों पर क्या बोले मुख्य चुनाव अधिकारी?
पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने हटाए गए नामों की संख्या बताने से इनकार कर दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, 'हम नहीं जानते कि कितने नाम हटाए गए हैं या कितने नाम प्रकाशित किए जाएंगे।' उन्होंने आगे बताया कि सप्लीमेंट्री सूची जारी होने के बाद अगर किसी का नाम हटा दिया गया है तो वह कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा बनाए जाने वाले अपीलीय ट्रिब्यूनल में चुनौती दे सकता है। लेकिन अभी यह साफ़ नहीं है कि ये ट्रिब्यूनल कब बनेंगे और कब चुनौती दी जा सकेगी।
अग्रवाल ने कहा, 'राज्य सरकार ट्रिब्यूनल के लिए जगह देगी और हाईकोर्ट मंजूरी देगा। इसके बाद ही सभी 23 जिलों में ट्रिब्यूनल बनाए जाएंगे।' सीईओ ने बताया कि जिन जिलों में लंबित मामले कम थे वहाँ सभी मामलों का फ़ैसला हो चुका है। उन जिलों के न्यायिक अधिकारियों को अब ज़्यादा मामलों वाले इलाक़ों में भेज दिया गया है।
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क्या हुआ सप्लीमेंट्री लिस्ट के साथ?
पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के बाद फ़रवरी 28 को जारी अंतिम मतदाता सूची में करीब 60 लाख नाम अंडर एडजुडिकेशन यानी जांच के अधीन थे। इनमें से क़रीब 29 लाख मामलों की जाँच 705 न्यायिक अधिकारियों ने पूरी कर ली। सोमवार आधी रात को इस पहली पूरक सूची को ईसीआई की वेबसाइट, पश्चिम बंगाल सीईओ की वेबसाइट और जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया। लेकिन इसमें तुरंत दिक्कतें आने लगीं-
- ज्यादातर जगहों पर पीडीएफ डाउनलोड नहीं हो पा रही।
- कैप्चा एरर, टेक्निकल ग्लिच और सर्वर क्रैश की शिकायतें आईं।
- डाउनलोड बहुत धीमा या बिल्कुल नहीं हो रहा।
- विधानसभा क्षेत्र के आधार पर सूची देखना मुश्किल हो गया।
बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के अध्यक्ष स्वपन मंडल ने कहा कि सर्वर पूरी तरह क्रैश हो गया है। रात भर से डाउनलोड नहीं हो पा रहा। कुछ जगहों पर बीएलओ डाउनलोड कर पा रहे हैं, लेकिन आम लोगों के लिए मुश्किल है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि शुरुआती चरण में टेक्निकल ग्लिच हैं। कुछ घंटों में ठीक हो जाएगा। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने साफ़ कहा कि अभी जोड़े गए या हटाए गए नामों की कुल संख्या पर वे कमेंट नहीं कर सकते क्योंकि उनके पास सटीक डेटा नहीं है।
ममता बनर्जी का तीखा हमला
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज कोलकाता एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'बीजेपी का रबर स्टैंप चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन पर लगना साबित कर देता है कि आयोग को कौन पीछे से चला रहा है।' उन्होंने 2019 का एक पत्र दिखाया जिसमें चुनाव आयोग के पत्र पर केरल बीजेपी यूनिट का सील लगा था। ममता ने कहा कि यह पत्र सिर्फ केरल के लिए नहीं, बल्कि सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजा गया था। उन्होंने इसे क्लेरिकल मिस्टेक नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया राजनीतिक इरादा बताया।कई और आरोप लगाए
ममता ने कहा कि चुनाव आयोग ने 73 रिटर्निंग अधिकारियों को ट्रांसफर किया और चीफ सेक्रेटरी, होम सेक्रेटरी, डीजीपी सहित 70 बड़े आईएएस-आईपीएस अधिकारियों को बदला। नंदीग्राम के बीडीओ को भबानीपुर ट्रांसफर करना राजनीतिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग तटस्थ नहीं है और एक पार्टी का पक्ष ले रहा है। उन्होंने कहा कि रात में सूची जारी करना और हार्ड कॉपी न लगाना पारदर्शिता की कमी दिखाता है। लोग अभी भी नहीं जान पा रहे कि उनका नाम है या हटा दिया गया। उन्होंने सभी विपक्षी दलों से अपील की कि वे एक होकर 'एक पार्टी राज' और तानाशाही के खिलाफ लड़ें। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र बचाने का सवाल है। ममता ने यह भी कहा कि एसआईआर के कारण अब तक क़रीब 220 लोगों ने आत्महत्या कर ली है।
चुनाव की तैयारियाँ
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। अभी पहली पूरक सूची जारी हो गई है, लेकिन हटाए गए या जोड़े गए नामों की सही संख्या बाद में बताई जाएगी। आगे और पूरक सूचियां भी जारी होंगी।