क्या बांग्लादेश की नज़र भारत के 'चिकन नेक' पर है? वह आख़िर इस क्षेत्र में एक के बाद एक उकसावे वाला काम क्यों कर रहा है? भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे हैं और इसी बीच बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने चीनी राजदूत याओ वेन को तीस्ता नदी के प्रोजेक्ट इलाके में जाने की इजाजत दी। यह प्रोजेक्ट भारत के 'चिकन नेक' के बहुत क़रीब है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर को 'चिकन नेक' कहा जाता है। यह कॉरिडोर सिर्फ़ 22 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा इलाक़ा है, जो भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है। यह इलाक़ा भारत की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।

चीनी राजदूत याओ वेन ने एक दिन पहले रंगपुर जिले के तेफामाधुपुर थाना, शाहबाजपुर इलाके में तीस्ता नदी के कटाव प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उनके साथ बांग्लादेश की जल संसाधन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन भी गईं। बांग्लादेश सरकार ने कहा कि यह दौरा 'तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट' के तहत तकनीकी जांच के लिए था।
रिजवाना हसन ने स्थानीय पत्रकारों से कहा, 'चीन तीस्ता मास्टर प्लान को जल्द से जल्द लागू करना चाहता है। दोनों देश इस प्लान को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन प्रोजेक्ट की जांच प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए अभी काम शुरू नहीं हो सकता।' उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट बाढ़ नियंत्रण, नदी कटाव रोकने और सिंचाई के लिए बहुत ज़रूरी है।

क्या है तीस्ता मास्टर प्लान?

तीस्ता नदी बांग्लादेश के उत्तरी जिलों के लिए जीवनरेखा है। यहाँ की खेती और लोगों की आजीविका इसी नदी पर निर्भर है। भारत के पश्चिम बंगाल में भी तीस्ता का पानी बेहद अहम है। दशकों से भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता के पानी के बँटवारे पर बात चल रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार की चिंताओं के कारण कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया है।

अब बांग्लादेश चीन के साथ मिलकर तीस्ता पर बड़ा प्रोजेक्ट कर रहा है। चीन तकनीकी और आर्थिक मदद दे रहा है। रिजवाना हसन ने कहा कि चीन इस प्रोजेक्ट को जल्द शुरू करने के लिए उत्सुक है।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते ख़राब हैं। पिछले साल अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर बने मुहम्मद यूनुस ने चीन में एक इंटरव्यू में कहा था कि बांग्लादेश क्षेत्र में समुद्र का एकमात्र संरक्षक है और चीन को यहां मजबूत आर्थिक ढांचा बनाना चाहिए। उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर को 'लैंडलॉक्ड' बताया था। इन बातों से भारत नाराज़ हुआ था। दिसंबर में ढाका और अन्य शहरों में भारत विरोधी प्रदर्शन हुए, जहां भारतीय दूतावास पर हमले हुए।

इससे पहले रविवार को याओ वेन ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान से मुलाकात की। यूनुस के प्रेस विंग ने एक्स पर पोस्ट किया कि दोनों पक्षों ने आपसी हित के मुद्दों पर बात की। इसमें तीस्ता प्रोजेक्ट और बांग्लादेश-चीन फ्रेंडशिप हॉस्पिटल का जिक्र था। चीनी राजदूत ने कहा कि वे तीस्ता इलाके का दौरा करेंगे और तकनीकी जांच जल्द पूरी करेंगे।

भारत में चिंता क्यों?

'चिकन नेक' भारत की सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील है। अगर कोई बाहरी ताकत यहां प्रभाव बढ़ाए तो पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ाव पर असर पड़ सकता है। कई रिपोर्टों में इसे 'यूनुस सरकार द्वारा भारत को चिढ़ाने' की कोशिश बताया गया है। कुछ ने कहा कि यह भारत को संकेत है कि बांग्लादेश अब चीन की तरफ ज्यादा झुक रहा है।

भारत सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह दौरा रणनीतिक महत्व का है और भारत को सतर्क रहना होगा। तीस्ता प्रोजेक्ट पर चीन की दिलचस्पी बढ़ रही है। बांग्लादेश इसे अपनी कृषि और विकास के लिए जरूरी मानता है। लेकिन भारत के साथ पानी बंटवारे का पुराना विवाद अभी भी बरकरार है। यह दौरा दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है।