बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की दो-तिहाई बहुमत से ऐतिहासिक जीत के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। बीएनपी प्रमुख और संभावित अगले प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार हुमायूं कबीर ने शनिवार को भारत की समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में भारत के साथ “संतुलित संबंधों” की वकालत की। उन्होंने दक्षिण एशिया में बढ़ती कट्टरपंथी प्रवृत्तियों पर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में हिन्दू कट्टरता बढ़ रही है।
कबीर ने कहा कि दक्षिण एशिया में कट्टरपंथ एक क्षेत्रीय समस्या बनता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय समाज में “हिंदू कट्टरता और अतिदक्षिणपंथी असहिष्णुता” बढ़ रही है, जबकि पाकिस्तान में भी चरमपंथी तत्वों की खबरें आती रहती हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में स्थिति उस स्तर की नहीं है, लेकिन कुछ चुनौतियां यहां भी मौजूद हैं। कबीर ने जोर दिया कि क्षेत्रीय सरकारों को आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए। 
उन्होंने कहा कि खुफिया सूचनाओं और आकलनों को साझा करना तथा सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना आवश्यक है। अलग-थलग बैठकर जानकारी का आदान-प्रदान न करना प्रगति में बाधा बनता है। उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकारों के बीच सभी स्तरों पर सहयोग कूटनीति का सामान्य नियम है और इससे आतंकियों तथा उग्रवादियों की पहचान और निगरानी में विश्वास बढ़ेगा।

शेख हसीना को आतंकवादी बताया

भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर कबीर ने कहा कि दोनों देशों की सरकारों को अपने नजरिए में बदलाव लाना होगा, लेकिन इसकी पहली जिम्मेदारी भारत पर है। उन्होंने कहा कि भारत को यह समझना चाहिए कि आज के बांग्लादेश में शेख हसीना और अवामी लीग का अस्तित्व नहीं है और जनता ने भारी बहुमत देकर बीएनपी को जनादेश दिया है। कबीर ने शेख हसीना को “आतंकवादी” बताते हुए आरोप लगाया कि उनके शासन में 1,500 से अधिक लोगों की हत्या हुई और वह भारत भाग गईं। उन्होंने कहा कि यदि भारत इस स्थिति को स्वीकार कर सकारात्मक रुख अपनाए और हसीना को नियंत्रण में रखे तो सामान्य कूटनीतिक सहयोग विकसित हो सकता है।
कबीर ने कहा कि बांग्लादेश और भारत पड़ोसी देश हैं और उन्हें सहयोग करना चाहिए, लेकिन शेख हसीना का भारत में रहना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को उनकी कथित गतिविधियों में शामिल या सहयोगी नहीं दिखना चाहिए और अवामी लीग के लोगों को भारत की धरती का इस्तेमाल बांग्लादेश को अस्थिर करने के लिए नहीं करने देना चाहिए।
शेख हसीना और अवामी लीग को भारत का करीबी माना जाता रहा है, जबकि बीएनपी और भारतीय राजनीतिक प्रतिष्ठान के बीच संबंध पहले भी तनावपूर्ण रहे हैं, यहां तक कि जब तारिक रहमान की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया सत्ता में थीं। हालांकि बीएनपी की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले तारिक रहमान को बधाई दी। रहमान 17 साल के लंदन निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे हैं। कबीर ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और तारिक रहमान के बीच फोन पर सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई, जिसमें सहयोग पर चर्चा हुई और भारत आने का निमंत्रण भी दिया गया।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और विदेश नीति के मुद्दे पर भी कबीर ने प्रतिक्रिया दी। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले और हत्याओं की घटनाएं सामने आई हैं। भारत ने इस पर चिंता जताई थी। कबीर ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में हसीना शासन के दौरान बांग्लादेश की विदेश नीति भारत की नीति के अधिक अनुरूप थी, जिससे देश में असंतोष था। उन्होंने कहा कि नई सरकार संतुलित संबंध चाहती है और किसी एक देश तक अपने संबंध सीमित नहीं करेगी। ऐसे किसी समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो अन्य देशों के साथ व्यापार में बाधा बने।
कबीर ने यह भी कहा कि भारत में जिस तरह अल्पसंख्यक हिंसा की घटनाएं देखने को मिलती हैं, वैसी स्थिति बांग्लादेश में नहीं है और वहां सांप्रदायिक सौहार्द कायम है। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2024 के जनविद्रोह के बाद जब पांच दिनों तक सरकार नहीं थी, तब भी किसी ने अल्पसंख्यकों पर हमला नहीं किया, क्योंकि तारिक रहमान ने लोगों से शांत रहने और कानून हाथ में न लेने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में मुस्लिम और अल्पसंख्यक समुदाय शांतिपूर्वक साथ रहते हैं।

सही समय पर तारिक रहमान भारत की यात्रा करेंगे

तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा पर कबीर ने कहा कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता घरेलू मामलों को संभालना और देश को आर्थिक सुरक्षा व समृद्धि की दिशा देना है। उन्होंने कहा कि उपयुक्त समय आने पर वह भारत की यात्रा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आमंत्रित किया है और अनुकूल समय पर वह इसे स्वीकार करेंगे।

मोहम्मद यूनुस ने तारिक रहमान को बधाई दी

इधर अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने भी तारिक रहमान को चुनावी जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट जनादेश बांग्लादेश की संवैधानिक और लोकतांत्रिक निरंतरता तथा संस्थागत स्थिरता के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यूनुस ने विश्वास जताया कि रहमान की समझदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता और जनकल्याण की भावना देश को स्थिर, समावेशी और विकासोन्मुख दिशा में ले जाएगी। उन्होंने रहमान के पिता पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के आदर्शों और उनकी माता बेगम खालिदा जिया के लोकतांत्रिक नेतृत्व को याद करते हुए आशा व्यक्त की कि वे इन मूल्यों को आगे बढ़ाएंगे।
यूनुस ने आर्थिक परिवर्तन, तकनीकी प्रगति, जलवायु सहनशीलता, मानव संसाधन विकास और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सक्रिय भागीदारी को अहम बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और जवाबदेह प्रशासन को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने अंतरिम सरकार के दौरान तारिक रहमान के सहयोग और रचनात्मक भूमिका के लिए भी उनका धन्यवाद किया और कहा कि लोकतांत्रिक माहौल बनाए रखने में उनका सकारात्मक रुख महत्वपूर्ण रहा।