डोनाल्ड ट्रंप के जिस टैरिफ़ ने पूरी दुनिया और इसकी अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया, उसको अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया है। इस फ़ैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक टैरिफ नीति को बड़ा झटका दे दिया है। कोर्ट ने शुक्रवार को फ़ैसला सुनाया कि ट्रंप 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर टैरिफ नहीं लगा सकते। यह फ़ैसला 6-3 के बहुमत से आया, जिसमें चीफ़ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की राय लिखी। ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के आधार पर ही पूरी दुनिया के देशों पर टैरिफ़ लगाए हैं।

ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में 'रिसिप्रोकल' टैरिफ लगाए। यानी लगभग हर देश से आने वाले सामान पर शुल्क। इसमें ज्यादातर देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ और चीन, कनाडा, मैक्सिको जैसे कुछ देशों पर ज्यादा टैरिफ शामिल थे। ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को इसे 'लिबरेशन डे' पर घोषित किया था। उन्होंने दावा किया था कि व्यापार घाटा, फेंटेनिल ड्रग्स की तस्करी और अन्य समस्याएं राष्ट्रीय आपातकाल हैं, इसलिए IEEPA के तहत टैरिफ लगाना वैध है।

'टैक्स लगाने का अधिकार राष्ट्रपति नहीं, संसद के पास'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी संविधान के अनुसार टैरिफ और टैक्स लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। आईईईपीए क़ानून आपातकाल में इकोनॉमिक पावर देने के लिए है, लेकिन टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता। कोर्ट ने 'मेजर क्वेश्चंस डॉक्ट्रिन' का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि बहुत बड़े आर्थिक असर वाली नीतियाँ कांग्रेस की साफ़ मंजूरी से ही हो सकती हैं। चीफ़ जस्टिस रॉबर्ट्स ने लिखा, 'राष्ट्रपति को टैरिफ़ लगाने की असाधारण शक्ति के लिए कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी दिखानी होगी, जो यहां नहीं है।'

कंजर्वेटिव द्वारा अपनाया गया यह 'मेजर क्वेश्चंस डॉक्ट्रिन' कहता है कि सरकार अगर कोई ऐसा बड़ा फ़ैसला या कार्रवाई करती है, जिसका बहुत बड़ा आर्थिक या राजनीतिक असर पड़ता है तो उसके लिए कांग्रेस से स्पष्ट रूप से अनुमति मिली होनी चाहिए। अदालत ने इसी सिद्धांत का इस्तेमाल करके जो बाइडन के कुछ अहम कार्यकारी आदेशों व नीतियों को रोक दिया था या उन्हें रद्द कर दिया था।

ट्रंप कार्यकाल में नियुक्त जजों ने भी साथ नहीं दिया?

रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार इस फ़ैसले में ट्रंप के कार्यकाल में नियुक्त जस्टिस नीले गोरसच और एमी कोनी बैरेट ने भी बहुमत में शामिल होकर उनके ख़िलाफ़ वोट दिया। असहमति जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल अलिटो और ब्रेट कवनॉ ने जताई।

यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी क़ानूनी हार है। ट्रंप ने टैरिफ़ को अपनी आर्थिक और विदेश नीति का मुख्य हथियार बनाया था। इससे अमेरिका को ट्रेड डील्स में फ़ायदा मिला, लेकिन कई सहयोगी देश नाराज हुए।

किसने दी थी चुनौती?

सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला टैरिफ़ से प्रभावित बिज़नेस और 12 अमेरिकी राज्यों की क़ानूनी चुनौती पर सुनवाई के बाद आया है। इन 12 अमेरिकी राज्यों में से ज़्यादातर डेमोक्रेटिक-गवर्नर हैं। इन राज्यों ने अपील में कहा है कि ट्रंप ने इस क़ानून का एकतरफ़ा इस्तेमाल किया और इस क़ानून का ऐसा पहले कभी इस्तेमाल नहीं हुआ था।

175 अरब डॉलर से ज्यादा रिफंड करना होगा?

ट्रंप के टैरिफ़ से अगले दस सालों में यूनाइटेड स्टेट्स को ट्रिलियन डॉलर का रेवेन्यू मिलने का अनुमान था। रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप के एडमिनिस्ट्रेशन ने 14 दिसंबर से टैरिफ़ कलेक्शन का डेटा नहीं दिया है। लेकिन पेन-व्हार्टन बजट मॉडल के इकोनॉमिस्ट ने शुक्रवार को अनुमान लगाया कि आईईईपीए के आधार पर ट्रंप के टैरिफ़ में इकट्ठा की गई रक़म 175 बिलियन डॉलर से ज़्यादा थी। और आईईईपीए-बेस्ड टैरिफ़ के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के साथ उस रकम को शायद वापस करना होगा।

ट्रंप टैक्स नहीं लगा सकते, संसद का अधिकार

अमेरिकी संविधान टैक्स और टैरिफ जारी करने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि कांग्रेस को देता है। लेकिन ट्रंप ने इसके बजाय कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना लगभग हर अमेरिकी ट्रेडिंग पार्टनर पर टैरिफ लगाने के लिए आईईईपीए का इस्तेमाल करके एक कानूनी अधिकार का इस्तेमाल किया। ट्रंप ने दूसरे क़ानूनों के तहत कुछ और टैरिफ़ लगाए हैं जो इस मामले में मुद्दा नहीं हैं। अक्टूबर से दिसंबर के बीच के सरकारी डेटा के आधार पर ये ट्रंप के लगाए टैरिफ़ से होने वाले रेवेन्यू का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं।

ट्रंप अब आगे क्या कर सकते हैं?

आईईईपीए राष्ट्रपति को नेशनल इमरजेंसी में कॉमर्स को रेगुलेट करने देता है। ट्रंप टैरिफ लगाने के लिए आईईईपीए का इस्तेमाल करने वाले पहले राष्ट्रपति बने। ट्रंप ने टैरिफ को अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा के लिए ज़रूरी बताया और अनुमान लगाया कि इनके बिना देश बेबस और बर्बाद हो जाएगा। नवंबर में ट्रंप ने कहा था कि उनके टैरिफ के बिना बाकी दुनिया हम पर हंसेगी क्योंकि उन्होंने सालों से हमारे खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल किया है और हमारा फायदा उठाया है।

नवंबर में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में दलीलें सुनने के बाद ट्रंप ने कहा था कि अगर टैरिफ पर उनके खिलाफ फैसला आता है तो वह दूसरे तरीकों पर विचार करेंगे, और रिपोर्टर्स से कहा कि हमें एक 'गेम टू' प्लान बनाना होगा। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और दूसरे अधिकारियों ने कहा था कि अमेरिका ट्रंप के ज़्यादा से ज़्यादा टैरिफ को बनाए रखने के लिए दूसरे कानूनी वजहों का इस्तेमाल करेगा। इनमें एक कानूनी नियम भी शामिल है जो अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा पैदा करने वाले इम्पोर्टेड सामान पर टैरिफ लगाने की इजाज़त देता है और दूसरा जो बदले की कार्रवाई की इजाज़त देता है। इनमें उन ट्रेडिंग पार्टनर के खिलाफ टैरिफ शामिल हैं जिनके बारे में अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव का ऑफिस यह तय करता है कि उन्होंने अमेरिकी एक्सपोर्टर्स के खिलाफ गलत ट्रेड प्रैक्टिस का इस्तेमाल किया है।