अमेरिकी मीडिया ने गुरुवार को राष्ट्रपति ट्रंप के हवाले से खबर दी कि ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामनेई मॉस्को भाग सकते हैं। पांच दिनों पहले द टाइम और न्यूज़वीक ने खबर दी थी कि अगर ईरान में आंदोलन और भड़कता है तो खामनेई का ईरान से भागने का प्लान तैयार है। लेकिन रॉयटर्स ने शुक्रवार को खबर दी कि खामनेई कुछ देर में ईरान की जनता को संबोधित करेंगे। इसके बाद पूरी दुनिया की नज़रें खामनेई के भाषण पर लग गईं। खामनेई ने ईरानी जनता को संबोधित करते हुए अपना पूरा फोकस अमेरिका और ट्रंप पर रखा।
सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई ने अपने भाषण में कहा कि कुछ "दंगाई" अपने ही देश की संपत्तियों को नष्ट कर रहे हैं ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश किया जा सके। खामनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति से अपने देश की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने ईरान की हिंसक घटनाओं को "आतंकवादी कार्रवाई" बताते हुए उसकी निन्दा की। 

ट्रंप को खुश करने के लिए प्रदर्शन हो रहे हैंः खामनेई

उन्होंने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथ 1,000 से अधिक ईरानियों के खून से सने हैं।" ये टिप्पणियां पिछले साल जून में अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु संयंत्रों पर किए गए हमलों के संदर्भ में थीं। खामनेई ने कहा- “सभी को यह जानना चाहिए कि इस्लामी गणराज्य लाखों सम्मानित लोगों की कुर्बानी से सत्ता में आया है, और यह विध्वंसक ताकत के सामने झुकने वाला नहीं है।” राजधानी तेहरान में अशांति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। “वे उन्हें खुश करना चाहते हैं। अगर उन्हें देश चलाना आता, तो वे अपना देश चलाते। अमेरिका के भीतर कई समस्याएं हैं। ट्रंप को उन पर ध्यान देना चाहिए।”

ताज़ा ख़बरें
एपी की रिपोर्ट के अनुसार, खामनेई जब जुमे के मौके पर भीड़ को संबोधित कर रहे थे तो भीड़ ने "अमेरिका मुर्दाबाद!" के नारे लगाकर जवाब दिया। यहां बताना ज़रूरी है कि ईरान-इसराइल युद्ध के दौरान भी खामनेई के बंकर में छिपने या देश छोड़कर भागने की खबरें अमेरिकी और इसराइली मीडिया में चली थीं। लेकिन उसी दौरान एक जुमे को खामनेई सामने आए और जुमे का खुतबा दिया, साथ ही ईरानी जनता को संबोधित किया। 9 जनवरी को वैसा ही घटनाक्रम दोहराया गया।
ईरान में आर्थिक संकट को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं। ये प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए थे और अब सभी 31 राज्यों में फैल चुके हैं। मुद्रा रियाल के मूल्य में भारी गिरावट, 40-50% मुद्रास्फीति और ईंधन कीमतों में वृद्धि के कारण जनता सड़कों पर उतर आई है। प्रदर्शनकारियों ने "तानाशाह मुर्दाबाद" और "खामनेई मुर्दाबाद" जैसे नारे लगाए।

ईरान सरकार ने प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए व्यापक इंटरनेट ब्लैकआउट, फोन लाइनों और बिजली कटौती लागू की है, जिससे 8.5 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 45 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, जिनमें 8 नाबालिग शामिल हैं। 2,270 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए हैं। कुछ शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों को आग लगाई और सुरक्षा बलों से झड़पें हुईं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से चेतावनी दी है कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग करता है तो अमेरिका "कड़ी कार्रवाई" करेगा और "तैयार है"। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का समर्थन किया। अमेरिका में निर्वासित रह रहे ईरान के शाह परिवार के प्रिंस रज़ा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों को "साहसी देशवासी" बताते हुए इंटरनेट बहाली की मांग की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई की अपील की।

राष्ट्रपति मसूद पेजेशेकियान ने प्रदर्शनकारियों की "वैध मांगों" को स्वीकार करने का वादा किया है लेकिन हिंसा की निंदा की। सरकार ने 21 प्रांतों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया और सुरक्षा बलों को तैनात किया है। तुर्किश एयरलाइंस ने तेहरान की उड़ानें रद्द कर दी हैं। दुबई जाने वाली फ्लाइट्स भी कैंसल हुई हैं।

ये प्रदर्शन 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद सबसे बड़ा है। खराब अर्थव्यवस्था को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक बदलाव की मांग तक पहुंच गया है। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और आगे की घटनाओं पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।