अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावोस में 'बोर्ड ऑफ पीस' का चार्टर औपचारिक रूप से घोषित और हस्ताक्षर करने वाले हैं। यह समारोह गुरुवार 22 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दावोस में  दोपहर 3 बजे शुरू होगा। उससे पहले यह खबर आ चुकी है कि ब्रिटेन ने इस चार्टर पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है। लेकिन बोर्ड ऑफ पीस को लेकर कई घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, जिसे जानना ज़रूरी है।

यूके का बोर्ड के चार्टर पर हस्ताक्षर से साफ इंकार

रूस की संलिप्तता को लेकर चिंता जताते हुए ब्रिटेन ने ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस के चार्टर पर हस्ताक्षर नहीं करने की घोषणा की है
ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा है कि ब्रिटेन आज गुरुवार को दावोस में होने वाले शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। इस तरह वह उन देशों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। इस सूची में फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन और स्लोवेनिया भी पहले से ही शामिल हैं। दावोस से बीबीसी पर कूपर ने कहा कि यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध के बीच अन्य संघर्षों के लिए शांति योजनाएँ बनाने में रूस की भूमिका को लेकर ब्रिटेन चिंतित है। कूपर ने कहा, “हम आज (गुरुवार) हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक नहीं होंगे, क्योंकि यह एक कानूनी संधि है जो कहीं अधिक व्यापक मुद्दों को उठाती है, और हमें इस बात की भी चिंता है कि राष्ट्रपति पुतिन शांति की बात करने वाली किसी चीज का हिस्सा बन रहे हैं।”

यह पहल मूल रूप से ग़ज़ा संघर्ष विराम और युद्ध के बाद ग़ज़ा को फिर से खड़ा करने के लिए तैयार की गई थी। लेकिन ट्रंप ने अब इसे एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष-मध्यस्थता निकाय में विस्तारित कर दिया है। यानी दो देशों में विवाद सुलझाने के लिए यूएन में जाने की बजाय ट्रंप को बोर्ड ऑफ पीस में आना होगा। दर्जनों देशों को अमेरिका ने शामिल होने का निमंत्रण दिया है। जिन देशों ने इसमें शामिल होने से इनकार किया, उन्हें धमकियां भी दी गईं।

ताज़ा ख़बरें
अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बुधवार को सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि 20 से अधिक देशों ने पहले ही निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हमें 20 से अधिक, शायद 25 विश्व नेता मिल चुके हैं जिन्होंने स्वीकार किया है।" हाल की रिपोर्टों के अनुसार, व्हाइट हाउस अधिकारियों ने 60 देशों को निमंत्रण भेजा है, और 59 देशों को शामिल होने की संभावना बताई जा रही है।

स्वीकार करने वाले देशों में इसराइल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, जॉर्डन, कतर, मिस्र, नाटो सदस्य तुर्की और हंगरी शामिल हैं। अन्य भाग लेने वाले देशों में मोरक्को, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, कोसोवो, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान और बेलारूस हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी निमंत्रण दिया गया है, और ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है। लेकिन पुतिन ने स्वीकार करने की शर्तें लगा दी हैं। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको को भी आमंत्रित किया गया है। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान दावोस पहुंच चुके हैं और संस्थापक सदस्य के रूप में चार्टर पर हस्ताक्षर करेंगे।

पिछले सप्ताह, व्हाइट हाउस ने 'बोर्ड ऑफ पीस' के गठन की घोषणा की, साथ ही ग़ज़ा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति की मंजूरी दी, जो एन्क्लेव में संक्रमणकालीन चरण को प्रबंधित करने वाली चार निकायों में से एक है। बोर्ड के गठन का समय संघर्ष विराम समझौते के दूसरे चरण की शुरुआत के साथ मेल खाता है, जिसने इसराइल के ग़ज़ा पर युद्ध को रोक दिया है, जिसमें अक्टूबर 2023 से अब तक 71,000 से अधिक लोग मारे गए हैं और 171,000 से अधिक घायल हुए हैं।

बोर्ड, जिसमें ट्रंप को आजीवन अध्यक्ष बनाया जाना संभावित है, एक अंतरराष्ट्रीय शांति-निर्माण संगठन के रूप में कार्य करेगा। व्हाइट हाउस अधिकारियों ने कहा कि आमंत्रित देशों को बताया गया है कि बोर्ड पर स्थायी सदस्यता के लिए पहले वर्ष में कम से कम 1 बिलियन डॉलर देना आवश्यक है।

ड्राफ्ट चार्टर के अनुसार, सदस्य देशों को शुरू में तीन वर्ष का कार्यकाल दिया जाएगा, जबकि वित्तीय प्रतिबद्धता करने वालों के लिए स्थायी सीटें आरक्षित होंगी।

इन देशों ने बोर्ड में शामिल होने से मना किया

फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन और स्लोवेनिया ने इस पहल में शामिल होने से इनकार कर दिया है, उनका कहना है कि इससे संयुक्त राष्ट्र की भूमिका कमजोर हो सकती है। अन्य यूरोपीय देशों, जैसे जर्मनी, यूके और इटली, ने अब तक कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। स्पेन ने कहा कि यूरोपीय नेता एक सामान्य स्थिति बनाने पर काम कर रहे हैं। कुछ राजनयिकों को बोर्ड की सदस्यता और 1 बिलियन डॉलर की फीस पर चिंता है, जो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखते हैं। ट्रंप ने कहा है कि बोर्ड "संयुक्त राष्ट्र को प्रतिस्थापित कर सकता है," जिससे वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं।


बोर्ड ऑफ पीस की कार्यकारी समिति में पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर, अरबपति मार्क रोवन, विश्व बैंक समूह के प्रमुख अजय बंगा और अमेरिकी राजनीतिक सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल शामिल होने की उम्मीद है।

यूरोपीय देश विभाजित

इस पहल की शुरुआत ग़ज़ा पर केंद्रित थी, लेकिन ट्रंप अब वैश्विक संघर्षों को हल करने का दावा करते नज़र आ रहे हैं। यह संयुक्त राष्ट्र को सीधे चुनौती है। इसीलिए यूरोपीय देशों में विभाजन साफ है, कुछ देश इसे अमेरिकी नेतृत्व की मंशा पर शक जता रहे हैं। ट्रंप ने दावोस में ग्रीनलैंड पर अपनी धमकियां वापस लीं और भविष्य के सौदे का फ्रेमवर्क घोषित किया, लेकिन बोर्ड पर ध्यान केंद्रित रखा। पाकिस्तान को शामिल करने पर आलोचना हो रही है। पुतिन के निमंत्रण पर मित्र देशों में संदेह है।

बोर्ड ऑफ पीस पर पुतिन की शर्त

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस अमेरिकी प्रशासन द्वारा फ्रीज की गई रूसी संपत्तियों से प्रस्तावित "बोर्ड ऑफ पीस" में 1 बिलियन डॉलर का योगदान देने के लिए तैयार है। यानी अमेरिका ने रूस का जो पैसा ज़ब्त कर रखा है, उसी में से पैसा दिया जा सकता है। लेकिन अमेरिका को सारे फंड जारी करने होंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शेष फ्रीज फंड्स का उपयोग रूस-यूक्रेन संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए किया जा सकता है, बशर्ते कोई शांति समझौता हो जाए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि पुतिन ने इस पहल में शामिल होने की सहमति दे दी है, लेकिन पुतिन ने इसे खारिज करते हुए कहा कि निमंत्रण अभी विचाराधीन है और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।


पुतिन ने रूस की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में कहा कि रूस के विदेश मंत्रालय को इस प्रस्ताव का अध्ययन करने और साझेदारों के साथ तालमेल करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने जोर दिया कि बोर्ड ऑफ पीस मुख्य रूप से मध्य पूर्व में शांति स्थापना, फिलिस्तीनी लोगों की समस्याओं के समाधान और ग़ज़ा में मानवीय स्थिति पर केंद्रित है। पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि 1 बिलियन डॉलर का योगदान भागीदारी के अंतिम फैसले से पहले भी दिया जा सकता है, जो रूस की फिलिस्तीनी लोगों से विशेष संबंधों को दर्शाता है।