ईरान युद्ध के लिए डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें मध्य पूर्व में ही नहीं, अपने घर अमेरिका में भी बढ़ गई हैं। यूरोपीय देशों तक में ट्रंप को भारी विरोध झेलना पड़ रहा है। उनकी नीतियों के ख़िलाफ़ लोग लाखों की संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं। उनकी नीतियों के ख़िलाफ़ अमेरिका और यूरोप भर में 'नो किंग्स' प्रोटेस्ट हुआ। इनमें लोगों की भीड़ ने ईरान युद्ध और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के क़दमों के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों की शिकायतों की लंबी सूची थी। इसमें ईरान युद्ध, ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन कार्रवाई, और ट्रांसजेंडर अधिकारों पर पाबंदियां शामिल थीं। वाशिंगटन डीसी में सैकड़ों लोग लिंकन मेमोरियल के पास से नेशनल मॉल तक मार्च करते हुए गए। उन्होंने तख्तियां उठाई थीं जिन पर लिखा था, 'क्राउन उतारो, जोकर' और 'शासन बदलाव घर से शुरू होता है'। लोग घंटियां बजा रहे थे, ड्रम बजा रहे थे और 'नो किंग्स' के नारे लगा रहे थे।
इन प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र मिनेसोटा रहा। सेंट पॉल में मिनेसोटा कैपिटल के लॉन और आस-पास की सड़कों पर हज़ारों लोग पहुँचे थे। कुछ लोगों ने अमेरिका के झंडे उलटे पकड़े हुए थे, जो ऐतिहासिक रूप से संकट का संकेत माना जाता है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार 'नो किंग्स' नाम के विरोध प्रदर्शन के आयोजकों ने कहा कि यह प्रदर्शन इतिहास के सबसे बड़े विरोधों में से एक हो सकता है। 'नो किंग्स' नाम के विरोध प्रदर्शन ट्रंप की नीतियों के ख़िलाफ़ पहले भी हो चुके हैं।
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अमेरिका में 3100 जगहों पर प्रदर्शन

प्रदर्शन न्यूयॉर्क शहर से लेकर आइडाहो के छोटे से शहर ड्रिग्स तक हुए। न्यूयॉर्क में लगभग 85 लाख लोग रहते हैं, जबकि ड्रिग्स में सिर्फ 2,000 से कम। आयोजकों ने बताया कि जून में पहले दौर में 50 लाख से ज्यादा और अक्टूबर में 70 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। इस बार शनिवार को वे 90 लाख लोगों के आने की उम्मीद कर रहे थे। अभी यह साफ नहीं है कि कितने लोग वाक़ई आए। आयोजकों के अनुसार, पूरे 50 राज्यों में 3100 से ज्यादा कार्यक्रम रजिस्टर्ड थे। यह अक्टूबर से 500 ज्यादा हैं।

ट्रंप का उड़ाया मजाक

कान्सास के टोपेका में एक प्रदर्शन में लोग 'मेंढक किंग' और ट्रंप को बच्चे के रूप में नकल करते दिखे। एक महिला ने 'कैट्स अगेन्स्ट ट्रंप' वाला साइन बोर्ड लेकर 32 किलोमीटर दूर से आकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, 'ट्रंप प्रशासन की बहुत सी बातें मुझे परेशान करती हैं, लेकिन यह प्रदर्शन मुझे बहुत उम्मीद देता है।'
मिनेसोटा में इस विरोध-प्रदर्शन के मुख्य आकर्षण थे प्रसिद्ध गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन। उन्होंने 'स्ट्रीट्स ऑफ मिनियापोलिस' गाना गाया। यह गाना उन्होंने रेनी गुड और एलेक्स प्रेट्टी की मौत के जवाब में लिखा था। इन दोनों की मौत संघीय एजेंटों की गोलीबारी में हुई थी। यह गाना उन हजारों मिनेसोटावासियों को भी समर्पित था, जो ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। 

विरोध प्रदर्शन के आयोजकों ने कहा कि लोगों का संघर्ष जारी रखना बाकी देश के लिए उम्मीद की किरण है। उन्होंने कहा कि आपकी ताकत और समर्पण ने हमें बताया कि यह अभी भी अमेरिका है।

ट्रंप से ऐसी नाराज़गी!

ब्रूस स्प्रिंगस्टीन का 'लैंड ऑफ होप एंड ड्रीम्स' अमेरिकी टूर 'नो किंग्स' थीम पर है, जो मंगलवार को मिनियापोलिस से शुरू होगा। कार्यक्रम से पहले रॉबर्ट डी नीरो का वीडियो दिखाया गया। उन्होंने कहा कि वे हर सुबह ट्रंप की वजह से उदास उठते हैं, लेकिन आज लाखों लोग विरोध कर रहे हैं, इसलिए वे खुश हैं। उन्होंने मिनेसोटा वासियों को बधाई दी कि उन्होंने आईसीई को वहां से भगा दिया।
न्यूयॉर्क में न्यूयॉर्क सिविल लिबर्टीज यूनियन की कार्यकारी निदेशक डॉना लिबरमैन ने कहा कि ट्रंप और उनके समर्थक चाहते हैं कि लोग विरोध करने से डरें। उन्होंने कहा, 'वे चाहते हैं कि हम डरें कि हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन वे गलत हैं, बिल्कुल गलत।'

'वामपंथी नेटवर्क' का प्रदर्शन: ह्वाइट हाउस

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इन प्रदर्शनों को 'वामपंथी फंडिंग नेटवर्क' का नतीजा बताया। एपी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि इनमें असली जनसमर्थन बहुत कम है। उन्होंने कहा, 'इन ट्रंप डिरेंजमेंट थेरेपी सेशंस में सिर्फ वे रिपोर्टर दिलचस्पी लेते हैं जो इनको कवर करने के लिए पैसे लेते हैं।' राष्ट्रीय रिपब्लिकन कांग्रेस कमिटी ने भी कड़ी आलोचना की। प्रवक्ता मौरीन ओटूल ने कहा, 'ये हेट अमेरिका रैलियां हैं, जहां वामपंथ के सबसे हिंसक और विकृत सपने माइक पर आते हैं।'
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यूरोप में भी प्रदर्शन

यूरोप और दुनिया के दूसरे देशों में भी प्रदर्शन हुए। इटली के रोम में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। वे प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने इसराइल और अमेरिका के ईरान पर हमलों के ख़िलाफ़ बैनर दिखाए और 'युद्ध मुक्त दुनिया' की मांग की। लंदन में ईरान युद्ध के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने 'फार राइट को रोकें' और 'नस्लवाद का विरोध करें' वाले बैनर लहराए।
पेरिस में सैकड़ों लोग, ज्यादातर फ्रांस में रह रहे अमेरिकी, फ्रेंच मजदूर यूनियन और मानवाधिकार संगठनों के साथ बस्तील पर इकट्ठा हुए। आयोजक ऐडा शेन ने कहा, 'मैं ट्रंप के सभी अवैध, अनैतिक, लापरवाह और बेकार युद्धों का विरोध करती हूं।' आयोजक एजरा लेविन ने बताया कि 12 से ज्यादा देशों में प्रदर्शन हुए। कुछ देशों में जहां संवैधानिक राजतंत्र है, वहां इसे 'नो टायरेंट्स' नाम दिया गया।
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यह तीसरा 'नो किंग्स' प्रदर्शन का दौर था। आयोजक मानते हैं कि ट्रंप प्रशासन की नीतियां सिर्फ बड़े शहरों या डेमोक्रेट समर्थकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे शहरों और रूढ़िवादी इलाकों तक लोगों को नाराज कर रही हैं। प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे और लोगों ने लोकतंत्र, मानवाधिकार और युद्ध विरोध की आवाज बुलंद की।