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प्रतीकात्मक तस्वीर

मणिपुर हिंसा पर यूरोपीय संसद ने प्रस्ताव पारित कर की आलोचना

फ्रांस की राजधानी पेरिस में 14 जुलाई को आयोजित बैस्टिल डे परेड में भाग लेने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय दौरे पर फ्रांस पहुंच चुके हैं। इससे पहले फ्रांस के स्ट्रासबर्ग स्थित यूरोपीय संसद ने बुधवार को एक प्रस्ताव पारित कर मणिपुर हिंसा को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की है।

 प्रस्ताव में भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर भी नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की गई है। यूरोपीय यूनियन की संसद में 6 संसदीय समूहों की तरफ से प्रस्तुत इस प्रस्ताव में मणिपुर में पिछले दो महीने से चल रही हिंसक वारदातों को न रोक पाने के लिए मोदी सरकार के तरीकों की तीखी आलोचना की है। इसमें कहा गया है कि हिंदू बहुसंख्यकवाद को बढ़ावा देने वाली राजनीति से प्रेरित और बंटवारा करने वाली नीतियों और आतंकी समूहों की गतिविधियों में हुई बढ़ोतरी से हम चिंतित हैं। 
यूरोपीय संसद से पारित इस प्रस्ताव में मणिपुर में हिंसा के बाद कर्फ्यू लगाने और इंटरनेट पर रोक लगाने के राज्य सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की गई। कहा है कि इससे मीडिया और सिविल सोसाइटी को हिंसा की सही सूचना नहीं मिल पा रही है और उन्हें रिपोर्टिंग में मुश्किल आ रही है।  
प्रस्ताव में कहा गया है कि सामाजिक विभाजन पैदा करने वाली नीतियों को लेकर हम चिंतित है। ये नीतियां हिंदू बहुसंख्यकवाद को बढ़ावा देती हैं। हाल के वर्षों में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता में गिरावट आई है। विभिन्न तरह के भेदभाव वाले कानूनों और प्रथाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन सब के कारण ईसाई, मुस्लिम, सिख और आदिवासी समुदायों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
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कहा कि यह हिंसा राजनीति से प्रेरित है

प्रस्ताव में कहा गया है कि हमने भारतीय अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वो जातीय और धार्मिक हिंसा को तुरंत रोके। धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए सरकार सभी जरुरी कदम उठाए। इसमें कहा गया है कि अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति असहिष्णुता ने मणिपुर में हिंसा को भड़काया है। यह हिंसा राजनीति से प्रेरित है। प्रस्ताव में कहा गया है कि सामाजिक विभाजन पैदा करने वाली नीतियों को लेकर हम चिंतित है। ये नीतियां हिंदू बहुसंख्यकवाद को बढ़ावा देती हैं। हाल के वर्षों में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता में गिरावट आई है। विभिन्न तरह के भेदभाव वाले कानूनों और प्रथाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन सब के कारण ईसाई, मुस्लिम, सिख और आदिवासी समुदायों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।  

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सभी पक्षों से संयम की अपील की गई

प्रस्ताव में भारत सरकार से आग्रह किया गया है कि वह संयुक्त राष्ट्र की सिफारिशों को मानते हुए आफ्स्पा को खत्म करे और सुरक्षा बलों द्वारा शक्ति के प्रयोग पर संयुक्त राष्ट्र के मूलभूत सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करे। इसमें मणिपुर के सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है। नेताओं से भी भड़काऊ बयानबाजी बंद करने की अपील की गई है ताकि तनाव खत्म करने में मदद मिल सके।   

भारत ने किया प्रस्ताव को खारिज 

भारत ने यूरोपियन यूनियन की संसद से पारित इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मणिपुर की मौजूदा स्थिति पर भारत सरकार अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। इसके बावजूद यूरोपियन यूनियन की संसद में इस प्रस्ताव को पेश किया गया है। जो कि आपत्तिजनक है।  उन्होंने कहा कि,यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है और हम यूरोपीय संसद में होने वाली घटनाओं से अवगत हैं। यूरोपीय सांसदों से भी इस संबंध में बात की है। 

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क़मर वहीद नक़वी
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