अमेरिका में भारत की छवि और ख़राब हो गई है! यह प्यू रिसर्च सेंटर की ताज़ा रिपोर्ट में आया है। पहली बार अमेरिका में भारत को सकारात्मक यानी अच्छी नज़र से देखने वालों की संख्या 50 प्रतिशत से नीचे आ गई है। सर्वे के मुताबिक 45 प्रतिशत अमेरिकी भारत के बारे में अच्छी राय रखते हैं, जबकि 50 प्रतिशत लोगों की राय भारत के प्रति नकारात्मक यानी भारत के विरोधी है। प्यू रिसर्च ने कहा कि उसने वर्ष 2008 से अमेरिकी नागरिकों से भारत के बारे में उनकी राय पूछनी शुरू की थी, और तब से अब तक यह सबसे कमजोर स्तरों में से एक है।

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस देश के बारे में अमेरिकियों की राय है जिसके बारे में पीएम मोदी ने लगातार कहा है कि वह देश को विश्वगुरु बनाएँगे और देश इसी राह पर है। पीएम के इसी बयान के मद्देनज़र जब पासपोर्ट रैंकिंग में भारत का स्थान लगातार गिरते हुए 81वें स्थान पर आया तो पीएम मोदी के विश्वगुरु के बयान की आलोचना हुई। अब अमेरिकियों में भारतीयों के बारे में नकारात्कम राय की ख़बर आई है। 

प्यू के आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में भारत को लेकर अमेरिकी लोगों की सकारात्मक सोच लगातार कम हुई है। 2023 में 51% अमेरिकियों की भारत के प्रति सकारात्मक राय थी। 2025 में यह घटकर 49% रह गई। 2026 में अब यह और गिरकर 45% पर पहुंच गई। वहीं, भारत के प्रति नकारात्मक राय रखने वालों का प्रतिशत बढ़कर 50% हो गया है।
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राजनीतिक विचारधारा का भी असर

रिपोर्ट में राजनीतिक झुकाव के आधार पर भी अंतर दिखाई दिया। डेमोक्रेट और डेमोक्रेट समर्थक निर्दलीयों में 50% लोगों की भारत के प्रति सकारात्मक राय है। वहीं रिपब्लिकन और उनके समर्थकों में यह आंकड़ा 42% है।

सर्वे में यह भी सामने आया कि अमेरिका में अलग-अलग उम्र के लोगों की सोच अलग है। 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 50% लोगों की भारत के प्रति अच्छी राय है। जबकि 18 से 29 वर्ष के केवल 42% युवा भारत को सकारात्मक नजरिए से देखते हैं।

प्यू सर्वे में अमेरिका के लोगों से भारत के वैश्विक प्रभाव को लेकर भी सवाल पूछा गया। 30% अमेरिकियों का मानना है कि दुनिया में भारत का प्रभाव बढ़ रहा है। 54% का कहना है कि भारत का प्रभाव पहले जैसा ही है। जबकि 13% लोगों का मानना है कि भारत का वैश्विक प्रभाव कमजोर हुआ है।

36 देशों में किया गया सर्वे

यह निष्कर्ष प्यू के स्प्रिंग 2026 ग्लोबल एटीट्यूड्स सर्वे पर आधारित है। इस सर्वे में 36 देशों के 42092 वयस्कों से बातचीत की गई। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में पहली बार ऐसा हुआ है कि भारत के प्रति नकारात्मक राय रखने वालों की संख्या सकारात्मक राय रखने वालों से अधिक हो गई है।

सर्वे में शामिल 36 देशों का औसत देखें तो 45% लोगों ने भारत के बारे में सकारात्मक राय दी। 41% लोगों की राय नकारात्मक रही। हालाँकि अलग-अलग देशों में भारत की छवि काफी अलग दिखाई दी।
इन देशों में भारत को सबसे ज्यादा समर्थन
  • श्रीलंका: 79%
  • ब्रिटेन: 71%
  • केन्या: 71%
  • जर्मनी: 63%
  • इटली: 56%
  • स्वीडन: 55%
  • जापान: 55%
  • थाईलैंड: 55%
  • कनाडा: 51%
सर्वे में इसराइल में भी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर फर्क देखा गया। दक्षिणपंथी विचारधारा वाले 68% लोगों की भारत के प्रति सकारात्मक राय है। जबकि वामपंथी विचारधारा वाले लोगों में यह आंकड़ा 46% है।

इन देशों में भारत की छवि कमजोर

पाकिस्तान में केवल 7% लोगों की भारत के प्रति सकारात्मक राय रही। तुर्की में 15%, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में 18% लोगों अच्छी राय व्यक्ति की। इन क्षेत्रों में अधिकांश लोगों ने भारत के प्रति नकारात्मक राय व्यक्त की।

बांग्लादेश में भी भारत की छवि कमजोर हुई

रिपोर्ट में बांग्लादेश का भी उल्लेख किया गया है। वहां 2024 में 57% लोगों की भारत के प्रति सकारात्मक राय थी, जो अब घटकर 42% रह गई है। यानी दो वर्षों में 15 प्रतिशत अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही जिन लोगों ने पहले कोई राय नहीं दी थी, उनका प्रतिशत भी 24% से घटकर 7% रह गया। इससे संकेत मिलता है कि अब अधिक लोगों ने भारत को लेकर स्पष्ट राय बनाई है।

एशिया में अलग-अलग तस्वीर

एशियाई देशों में भी भारत को लेकर राय एक जैसी नहीं है। जापान और थाईलैंड में 55% लोगों की सकारात्मक राय है। सिंगापुर में यह 51% है। इंडोनेशिया में 50% और फिलीपींस में 49% लोगों की भारत के प्रति अच्छी राय है। दक्षिण कोरिया में यह आंकड़ा 44% और मलेशिया में 41% है।
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बहरहाल, प्यू रिसर्च का कहना है कि भारत की वैश्विक छवि अलग-अलग देशों और समाजों में अलग-अलग है, लेकिन अमेरिका में इस वर्ष दर्ज हुई गिरावट पिछले लगभग दो दशकों में सबसे उल्लेखनीय बदलावों में से एक मानी जा रही है।

भारतीयों का भी डोनाल्ड ट्रंप से मोहभंग!

जून में ही प्यू रिसर्च के एक सर्वे में सामने आया था कि अमेरिका के प्रति भारतीयों की राय 25 साल में सबसे ज़्यादा नकारात्मक बन गई। ऐसी स्थिति टैरिफ़, सख़्त इमिग्रेशन नियमों और ईरान-गजा जैसे संघर्षों पर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की वजह से हुई है। यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन डोनाल्ड ट्रंप को बेहद 'घनिष्ठ दोस्त' बताते नहीं थकते हैं, उन्हीं की नीतियों से भारतीय इतने ख़फा हैं कि उनमें भारतीयों का भरोसा घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया है।

प्यू रिसर्च सेंटर दुनिया भर में पब्लिक ओपिनियन के लिए सम्मानित संस्थान माना जाता है। प्यू सर्वे के अनुसार केवल 45 प्रतिशत भारतीय अमेरिका को लेकर सकारात्मक राय रखते हैं, जबकि 31 प्रतिशत लोगों की अमेरिका के प्रति नकारात्मक सोच है। यह वर्ष 2002 से अब तक का सबसे अधिक नकारात्मक आंकड़ा माना जा रहा है। सर्वे में केवल 39 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप पर वैश्विक मामलों में सही फैसले लेने का भरोसा है। यह पिछले करीब 25 वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए भारतीयों का सबसे कम विश्वास का स्तर है।