अमेरिका में नवंबर 2026 में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले जारी एक नए सर्वे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता बढ़ाने वाले संकेत मिले हैं। सर्वे के अनुसार, भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का बड़ा वर्ग एक बार फिर डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर लौटता दिखाई दे रहा है। APIAVote और AAPI Data द्वारा जारी 2026 एशियन अमेरिकन वोटर सर्वे के मुताबिक करीब 66 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने कहा कि वे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट, दोनों चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। इसके मुकाबले हाउस चुनाव के लिए केवल 22 प्रतिशत और सीनेट चुनाव के लिए 18 प्रतिशत मतदाताओं ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करने की बात कही।

ये नतीजे बताते हैं कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भारतीय-अमेरिकियों के बीच जो समर्थन ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को मिला था, उसमें अब काफी गिरावट आई है।

2024 के मुकाबले बदला माहौल

2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच अपनी पकड़ पहले की तुलना में मजबूत की थी। उस समय कार्नेगी एंडोमेंट के एक सर्वे में अनुमान लगाया गया था कि करीब 32 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी मतदाता ट्रंप का समर्थन कर रहे थे। उस दौरान खास तौर पर भारतीय-अमेरिकी पुरुषों में ट्रंप की लोकप्रियता बढ़ी थी। सर्वे में क़रीब 40 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी पुरुषों ने कहा था कि वे ट्रंप को वोट देंगे।
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लेकिन दो साल बाद तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। ताज़ा सर्वे के अनुसार, भारतीय-अमेरिकी और अन्य एशियाई-अमेरिकी मतदाताओं में ट्रंप के प्रति असंतोष काफी बढ़ गया है।

ट्रंप के प्रति बढ़ी नाराजगी

सर्वे के अनुसार, 70 से 74 प्रतिशत एशियाई-अमेरिकी मतदाता डोनाल्ड ट्रंप के बारे में नकारात्मक राय रखते हैं। वहीं, कार्नेगी एंडोमेंट की 2026 की एक अन्य रिपोर्ट में पाया गया कि 71 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष के कामकाज से असंतुष्ट हैं।

मतदाताओं ने टैरिफ, इमिग्रेशन, फॉरेन पॉलिसी जैसी ट्रंप प्रशासन की कई नीतियों और उसके आर्थिक फैसलों पर नाराजगी जताई है।

महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा

सर्वे में सामने आया कि भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा महंगाई और जीवन-यापन का बढ़ता खर्च है। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाएं, अपराध, नस्लवाद और रोजगार से जुड़े मुद्दे भी मतदाताओं की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

जब लोगों से पूछा गया कि महंगाई और बढ़ती कीमतों से निपटने में किस पार्टी पर ज्यादा भरोसा है तो 44 प्रतिशत लोगों ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर भरोसा जताया, जबकि केवल 18 प्रतिशत ने रिपब्लिकन पार्टी को बेहतर माना। यह अंतर दिखाता है कि आर्थिक मुद्दों पर भी डेमोक्रेट्स को भारतीय-अमेरिकी समुदाय का अधिक समर्थन मिल रहा है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर भी सवाल

सर्वे में भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की राय सामने आई। करीब 55 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे ट्रंप सरकार के भारत-अमेरिका संबंधों को संभालने के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं।

यह परिणाम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि 2024 के चुनाव के दौरान रिपब्लिकन पार्टी ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया था।

नस्लवाद और अल्पसंख्यकों को लेकर चिंता

सर्वे के अनुसार, भारतीय-अमेरिकी समुदाय में नस्लवाद और एशियाई मूल के लोगों के खिलाफ बढ़ती नफरत को लेकर चिंता भी बढ़ी है। जो भारतीय-अमेरिकी खुद को रिपब्लिकन नहीं मानते उनमें से 27 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन इसलिए नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि पार्टी के भीतर अल्पसंख्यकों के प्रति असहिष्णुता है। यह आंकड़ा 2024 की तुलना में 10 प्रतिशत अंक अधिक है, जिससे संकेत मिलता है कि नस्लीय बयानबाजी और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दे अब पहले से अधिक अहम हो गए हैं।
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विदेश नीति भी अहम मुद्दा

सर्वे में शामिल 78 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि युद्ध और विदेश नीति उनके लिए बेहद अहम चुनावी मुद्दे हैं। ईरान सहित कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में अमेरिका की भूमिका और विदेश नीति को लेकर भी मतदाताओं ने अपनी चिंता व्यक्त की।

हालाँकि सर्वे में यह भी सामने आया कि डेमोक्रेटिक पार्टी की पहचान रखने वाले भारतीय-अमेरिकियों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में थोड़ी कमी आई है। 2020 में जहां 52 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी खुद को डेमोक्रेट मानते थे, वहीं 2026 में यह आंकड़ा घटकर 46 प्रतिशत रह गया है। इसके बावजूद रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं हुई है। 2026 में केवल 19 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी खुद को रिपब्लिकन मानते हैं।

इसका मतलब है कि डेमोक्रेट्स का समर्थन कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन भारतीय-अमेरिकी समुदाय में उनकी बढ़त अब भी काफी बड़ी बनी हुई है।
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भारतीय-अमेरिकी वोट क्यों हैं अहम?

अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की आबादी लगातार बढ़ रही है और अनुमान के मुताबिक वहां करीब 52 लाख भारतीय-अमेरिकी रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या में पंजीकृत मतदाता हैं, जो कई राज्यों में चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है, खासकर उन राज्यों में जहां मुकाबला बेहद करीबी रहने की संभावना है।

बहरहाल, 2026 एशियन अमेरिकन वोटर सर्वे से यह संकेत मिलता है कि भारतीय-अमेरिकी मतदाता आर्थिक चुनौतियों, महंगाई, नस्लवाद, आव्रजन नीति, विदेश नीति और भारत-अमेरिका संबंधों जैसे मुद्दों को ध्यान में रखकर अपने राजनीतिक फैसले ले रहे हैं। सर्वे के अनुसार, फिलहाल इस समुदाय का बड़ा हिस्सा डेमोक्रेटिक पार्टी पर अधिक भरोसा जता रहा है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के प्रति समर्थन 2024 के मुकाबले कमजोर होता दिखाई दे रहा है। यह रुझान नवंबर 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर बड़ा असर डाल सकता है।