ईरान में आर्थिक संकट, करेंसी के गिरने और भारी महंगाई को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। कई शहरों में प्रदर्शनों के दौरान झड़पों में कम से कम 7 लोग मारे गए और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुँचा।
आर्थिक संकट के खिलाफ ईरान में जबरदस्त प्रदर्शन के दौरान सात लोग मारे गए
ईरान में आर्थिक संकट के कारण भड़के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन जारी हैं। करेंसी रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने और महंगाई के 42 प्रतिशत से अधिक हो जाने के कारण दुकानदारों, व्यापारियों और छात्रों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया है। ये प्रदर्शन रविवार से शुरू हुए और अब कई शहरों में फैल चुके हैं, जहां सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है।
प्रदर्शनों की शुरुआत तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई, जहां दुकानदारों ने दुकानें बंद करके सरकार की आर्थिक नीतियों का विरोध किया। इसके बाद कम से कम 10 विश्वविद्यालयों के छात्र शामिल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने न केवल आर्थिक मुद्दों पर, बल्कि थियोक्रेटिक व्यवस्था के खिलाफ भी नारे लगाए, जैसे "तानाशाह मुर्दाबाद" और सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगे।
झड़पों में कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके, जिससे सरकारी इमारतें, बैंक, गवर्नर कार्यालय और अन्य भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। सुरक्षा बलों ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और कुछ जगहों पर गोलीबारी की सूचना है। मौतों की पुष्टि लोरदेगन, कुहदश्त और अन्य प्रांतों से हुई है, जहां एक पैरामिलिट्री बल के सदस्य की भी जान गई।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रदर्शनकारियों की "वैध मांगों" को सुनने की बात कही है और लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों की आजीविका का मुद्दा अगर हम हल नहीं कर सके तो "इस्लामी नज़रिए से हम जहन्नुम में जाएंगे। लेकिन आपको सरकार से बात करना होगी"। सरकार ने ठंड के मौसम का हवाला देकर एक दिन की छुट्टी घोषित की थी। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
ईरान लगातार अपना परमाणु कार्यक्रम चला रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देश इसके खिलाफ हैं। उन्होंने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। जून 2025 में इसराइल के साथ 12 दिन के संघर्ष ने भी अर्थव्यवस्था को कमजोर किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रदर्शन 2022 के महिला अधिकार आंदोलन के बाद सबसे बड़े हैं, हालांकि अभी देशव्यापी नहीं बने हैं। अंतरराष्ट्रीय पर ईरान अकेला पड़ गया है। वो सिर्फ घरेलू अर्थव्यवस्था के ज़रिए काम चला रहा है। हाल ही में रियाल करेंसी के गिरने पर सबसे पहले मोबाइल की दुकान चलाने वालों ने सरकार विरोधी प्रदर्शन किए थे। इसके बाद ये प्रदर्शन जोर पकड़ गए।
बहरहाल, ईरान सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को वैध बताया, लेकिन अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है। सरकारी इमारतों पर हमलों के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।